चैतन्य चरितामृत वाक्य
उच्चारण: [ chaiteny cheritaamerit ]
उदाहरण वाक्य
- अपने प्रसिद्ध संवादों में रामानंद राय, चैतन्य के लिए राधा को वर्णित करते हैं और अन्य पंक्तियों के बीच चैतन्य चरितामृत 2.8.100 के एक छंद को उद्धृत करते हैं, जिसके बाद वे वृन्दावन के प्राचीन समय में राधा की भूमिका वर्णित करते हैं.
- लेकिन गौरांग पर बहुत ग्रंथ लिखे गए, जिनमें प्रमुख है श्रीकृष्णदास कविराज गोस्वामी का चैतन्य चरितामृत, श्रीवृंदावन दास ठाकुर का चैतन्य भागवत, लोचनदास ठाकुर का चैतन्य मंगल, चैतन्य चरितामृत, श्री चैतन्य भागवत, श्री चैतन्य मंगल, अमिय निमाइ चरित और चैतन्य शतक आदि।
- लेकिन गौरांग पर बहुत ग्रंथ लिखे गए, जिनमें प्रमुख है श्रीकृष्णदास कविराज गोस्वामी का चैतन्य चरितामृत, श्रीवृंदावन दास ठाकुर का चैतन्य भागवत, लोचनदास ठाकुर का चैतन्य मंगल, चैतन्य चरितामृत, श्री चैतन्य भागवत, श्री चैतन्य मंगल, अमिय निमाइ चरित और चैतन्य शतक आदि।
- [26] चैतन्य वैष्णववाद की इस बंगाली परंपरा में आध्यात्मिक स्थिति और राधा की आराधना को माना जाता है कि कृष्णदास द्वारा अपने चैतन्य चरितामृत में स्थापित किया गया था जहां वे उस सिद्धांत को प्रदर्शित करते हैं जो चैतन्य के 1533 में महावसान के बाद वृंदावन के चैतन्यवादियों में व्याप्त रहा.
- [26] चैतन्य वैष्णववाद की इस बंगाली परंपरा में आध्यात्मिक स्थिति और राधा की आराधना को माना जाता है कि कृष्णदास द्वारा अपने चैतन्य चरितामृत में स्थापित किया गया था जहां वे उस सिद्धांत को प्रदर्शित करते हैं जो चैतन्य के 1533 में महावसान के बाद वृंदावन के चैतन्यवादियों में व्याप्त रहा.
- यह प्रयोग कितना सफल हुआ इसका एकमात्र पौराणिक इतिहास है कि गोकुल से नंदगांव आने के बाद कृष्ण को एक भी असुर, यक्ष एवं नाग का वध नहीं करना पड़ा क्योंकि इन गोपियों (नारियों) की रणभेरी की तरह गुन्जित हुंकार एवं चमचमाती लाठियां जो देखी थीं और ब्रजलीलाएं जो ब्रजलोक धर्म भवित प्रेमभावना की अगुरुसुगंधी (चैतन्य चरितामृत) लेकिन श्री चैतन्य एवं श्री बल्लभ से पांच दशक पूर्व आये ब्रजाचार्य श्रील्नारायण भट्ट ने ब्रजलोकधर्म के रूप में पुन: प्रतिष्ठित किया जिसका आज तक प्रभाव देखा जा सकता है।