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दशद्वार से सोपान तक वाक्य

उच्चारण: [ deshedvaar s sopaan tek ]

उदाहरण वाक्य

  1. उनकी आत्म कथा के चार खण्ड प्रकाशित हो चुके हैं-क्या भूलूँ क्या याद करूँ (1969), ‘ नीड़ का निर्माण फिर (1970) ' बसेरे से दूर (1977) ', दशद्वार से सोपान तक (1985) ।
  2. इनके नाम हैं-‘ क्या भूलूँ क्या याद करूँ ' (जन्म 1936 तक), ‘ नीड़ का निर्माण फिर ' (1951 तक), ‘ बसेरे से दूर ' (1955 तक) और ‘ दशद्वार से सोपान तक ' (1985 तक).
  3. डॉक्टर हरिवंशराय बच्चन के बारे में जिन्हे अधिक जानकारी प्राप्त करनी हो उनके लिये मै यही कह सकता हूं कि चार खंडों में प्रस्तुत उनकी आत्मकथा से बढकर दूसरा कोई अन्य उपाय नही हो सकता-क्या भूलूं क्या याद करूं, नीड का निर्माण फिर, बसेरे से दूर तथा दशद्वार से सोपान तक
  4. (यह अलग है कि विजय लक्ष्मी पंडित की ' The Scope of Happiness ', अमृता प्रीतम की ' रसीदी टिकट ', हरिवंश राय बच्चन के ' क्या भूलूँ क्या याद करूं, नीड़ का निर्माण, दशद्वार से सोपान तक ' आदि अनेक पुस्तके आत्मकथा होते हुए भी पाठकों द्वारा चाव से पढ़ी जाती है).
  5. राहुल सांकृत्यायन की पांच खंडों में प्रकाशित आत्मकथा ‘ मेरी जीवन यात्रा ' यशपाल की आत्मकथा ‘ सिंहावलोकन ' (तीन खंड), हरिवंशराय बच्चन की चार खंडों (क्या भूलूं क्या याद करूं, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक) में प्रकाशित आत्मकथा, डा. रामविलास शर्मा की ‘ आत्मकथा ‘ अपनी धरती अपने लोग ', नरेश मेहता की आत्मकथा ‘
  6. ! वो तेजी बच्चन जो मुझे इसलिये नही पसंद थी क्योंकि वो मधुशाला के कवि डॉ ० हरिवंशराय बच्चन की पत्नी थी, बल्कि इसलिये पसंद थीं क्योंकि मधुशाला के कवि की क़लम के निराश कवि ने जब उनसे पूँछा कि “ क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी क्या करूँ मैं? ” तो द्रवित होकर उन्होने उसे गले लगा लिया और जीवन साथी बन कर ऐसी प्रेरणा दी कि आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि पाकर उन्होने दशद्वार से सोपान तक का सफल सफर तय किया।
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