दुर्गाप्रसाद मिश्र वाक्य
उच्चारण: [ duregaaapersaad misher ]
उदाहरण वाक्य
- ‘ सारसुधानिधि ‘ में सक्रिय सहयोग देने के पश्चात सन 1880 में पं. दुर्गाप्रसाद मिश्र ने अपने स्वयं के पत्र ‘ उचित वक्ता ‘ का प्रकाशन प्रारंभ किया।
- जिस राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने के लिए ‘ उचित वक्ता ‘ का जन्म हुआ था उसे जीवित रखने के लिए पं. दुर्गाप्रसाद मिश्र को अनेक भूमिकाओं में उतरना पड़ता था।
- इसके उपरांत संवत् 1935 में पं. दुर्गाप्रसाद मिश्र के संपादन में ' उचितवक्ता ' और पं. सदानंद मिश्र के संपादन में ' सारसुधानिधि ' ये दो पत्र कलकत्तो से निकले।
- उचित वक्ता ' के संपादक दुर्गाप्रसाद मिश्र बाजारों और लोगों के घरों पर जाकर अपने अखबार को पढ़कर सुनाते थे और लोगों से मिले आने-दो आने से पत्रकारिता की लौ को जलाए रखा।
- उचित वक्ता (कलकत्ता, 1935, दुर्गाप्रसाद मिश्र) 13. सज्जन कीर्ति सुधाकर (उदयपुर, 1936, वंशीधार) 14. भारत सुदशाप्रवर्तक (फर्रुखाबाद 1936, गणेशप्रसाद) 15.
- बड़ाबाजार लाइब्रेरी की स्थापना में उस समय के साहित्यिक दिग्गज पण्डित प्रवर गोविन्द नारायण मिश्र, पं 0 छोटूलाल मिश्र, पं 0 दुर्गाप्रसाद मिश्र, लक्ष्मीनारायण बर्मन एवं पं 0 कालीप्रसाद तिवारी आदि का भरपूर सहयोग था।
- भारतेंदु के बाद इस क्षेत्र में जो पत्रकार आए उनमें प्रमुख थे पंडित रुद्रदत्त शर्म, (भारतमित्र, 1877), बालकृष्ण भट्ट (हिंदी प्रदीप, 1877), दुर्गाप्रसाद मिश्र (उचित वक्ता, 1878), पंडित सदानंद मिश्र (सारसुधानिधि, 1878), पंडित वंशीधर (सज्जन-कीर्त्ति-सुधाकर, 1878), बदरीनारायण चौधरी “प्रेमधन”
- अत: संवत् 1935 में पं. दुर्गाप्रसाद मिश्र, पं. छोटूलाल मिश्र, पं. सदानंद मिश्र और बाबू जगन्नाथप्रसाद खन्ना के उद्योग से कलकत्तो में ' भारतमित्र कमेटी ' बनी और ' भारतमित्र ' पत्र बड़ी धूमधाम से निकला जो बहुत दिनों तक हिन्दी संवाद पत्रों में एक ऊँचा स्थान ग्रहण किए रहा।