देवशयन वाक्य
उच्चारण: [ devesheyn ]
उदाहरण वाक्य
- ज्योतिषीय परिपेक्ष्य में सूर्य के आद्राü नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही देवशयन काल प्रारम्भ हो जाता है तथा चित्रा नक्षत्र तक यह समय रहता है।
- 5. अपने घर में देवशयन के दिन हल्दी या केले के पेड़ लगा कर प्रतिदिन हल्दी युक्त जल से सिंचित करें और गुरुवार को पूजन करें।
- 16 फरवरी से 23 अप्रैल तक शुक्रतारा, 6 जून से 13 जुलाई तक गुरू तथा 19 जुलाई से 17 नवंबर तक देवशयन अस्त होने पर विवाह नहीं होंगे।
- इसलिए जठराग्नि के रक्षण और दीपन के लिए देवशयन के बहाने से हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा विभिन्न पर्व-त्योहारों के माध्यम से व्रत-उपवास इत्यादि रखने की एक परम्परा निर्धारित की गई है।
- इसलिए जठराग्नि के रक्षण और दीपन के लिए देवशयन के बहाने से हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा विभिन्न पर्व-त्योहारों के माध्यम से व्रत-उपवास इत्यादि रखने की एक परम्परा निर्धारित की गई है।
- क्यों वर्जित हैं देवशयन में मांगलिक काय पं. विपिन कुमार पाराशर मद्भागवत आदि ग्रंथों में वर्णन है कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर बलि से तीन पग भूमि मांगी।
- देवशयन एकादशी के बाद चार माह कोई विवाहादि नहीं होते हैं और हरि प्रबोधिनी एकादशी से पहले चार माह कोई विवाह नहीं हुए होते हैं और ये दोनों दिन अतिशुभ श्रेणी में माने जाते हैं।
- आषाढ़ माह में देवशयन एकादशी से कार्तिक माह में हरि प्रबोधिनी एकादशी अर्थात आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चार माह श्रावण, भाद्रपद, आश्विन व कार्तिक माह को चतुर्मास कहते हैं।
- देवशयन (देवताओं की निन्द्रा) और देवोत्थान (देवताओं का जागना) के बीच का जो अन्तराल होता है, वो वर्षाकाल और शीतऋतु (सर्दियों) के प्रारंभ (आषाढ़ शुक्ल से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक) होने तक का समय होता है।
- चतुर्मास का प्रारंभ अर्थात देवशयन एकादशी व इसका अंतिम दिन अर्थात हरि प्रबोधिनी एकादशी, दोनों ही विशेष शुभ दिन माने जाते हैं और इन दोनों को अनबूझ मुहूर्त की संज्ञा उपलब्ध है अर्थात् इस दिन मुहूर्त शोधन के बिना कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि किए जा सकते हैं।