पंडितराज जगन्नाथ वाक्य
उच्चारण: [ penditeraaj jeganenaath ]
उदाहरण वाक्य
- हिन्दी के कवियों में केशवदास उनसे पूर्व हुए कवि थे और अब्दुर्रहीम खानखाना, प्रसिद्ध संस्कृत कवि पंडितराज जगन्नाथ, दूहर आदि समकालीन थे।
- शोभाकर से लेकर पंडितराज जगन्नाथ तक आलंकारिकों की सुदीर्ध परंपरा में मंखक का आलंकारिक के रूप में, एक प्रसंग को छोकर, कहीं संदर्भ नहीं है।
- इस बार आचार्य जी से नहीं रहा गया, बोले-वत्स, इसका लक्षण न तो पंडितराज जगन्नाथ ने रस गंगाधर में दिया है, न आनन्दवर्धन ने ध्वन्यालोक में।
- हिंदू अक्सर औरंगजेब के नाम से भड़कते हैं लेकिन भूल जाते है कि संस्कृत के सबसे बड़े काव्यशास्त्री पंडितराज जगन्नाथ को आश्रय औरंगजेब ने ही दिया था और उन्होंने मुगलवंश की शहजादी से विवाह किया था।
- संस्कृति काव्यशास्त्र में ` शब्द ` और ` अर्थ ` की प्रमुखता को लेकर यह बहस सदियों चली जिसे १ ७ वीं सदी में दोनों के महत्व को सहयोगी ठहरा कर पंडितराज जगन्नाथ ने एक निष्कर्ष तक पहुंचाया।।
- मम्मट (11वीं शताब्दी का उत्तरार्ध), रुय्यक (12वीं शताब्दी का पूर्वार्ध), हेमचंद्र (12वीं शताब्दी का उत्तरार्ध), पीयूषवर्ष जयदेव (13वीं शताब्दी का उत्तरार्ध), विश्वनाथ कविराज (14वीं शताब्दी का पूर्वार्ध), पंडितराज जगन्नाथ (17वीं शताब्दी का मध्यकाल)-इसी संप्रदाय के प्रतिष्ठित आचार्य हैं।
- मुगल सम्राट् अकबर ने हिंदू धर्म की प्राचीन परंपराओं के प्रति जो उदारता और अनुराग दिखाया, उसकी प्रेरणा पाकर भारतीय संस्कृति की धारा, जो बीच के काल में कुछ क्षीण हो चली थी, पुन: वेगवती हो गई और उसने तुलसीदास, मधुसूदन सरस्वती और पंडितराज जगन्नाथ जैसे महाकवियों और पंडितों को जन्म दिया एवं काशी पुन: अपने प्राचीन गौरव की अधिकारिणी बन गई।
- मम्मट (11 वीं शताब्दी का उत्तरार्ध), रुय्यक (12 वीं शताब्दी का पूर्वार्ध), हेमचंद्र (12 वीं शताब्दी का उत्तरार्ध), पीयूषवर्ष जयदेव (13 वीं शताब्दी का उत्तरार्ध), विश्वनाथ कविराज (14 वीं शताब्दी का पूर्वार्ध), पंडितराज जगन्नाथ (17 वीं शताब्दी का मध्यकाल)-इसी संप्रदाय के प्रतिष्ठित आचार्य हैं।
- कविता या काव्य क्या है, इस विषय में भारतीय साहित्य में आलोचकों की बड़ी समृद्ध परंपरा है-आचार्य विश्वनाथ, पंडितराज जगन्नाथ, पंडित अंबिकादत्त व्यास, आचार्य श्रीपति, भामह आदि संस्कृत के विद्वानों से लेकर आधुनिक आचार्य रामचंद्र शुक्ल तथा जयशंकर प्रसाद जैसे प्रबुद्ध कवियों और आधुनिक युग की मीरा महादेवी ने कविता का स्वरूप स्पष्ट करते हुए अपने अपने मत व्यक्त किए हैं।
- कविता या काव्य क्या है, इस विषय में भारतीय साहित्य में आलोचकों की बड़ी समृद्ध परंपरा है-आचार्य विश्वनाथ, पंडितराज जगन्नाथ, पंडित अंबिकादत्त व्यास, आचार्य श्रीपति, भामह आदि संस्कृत के विद्वानों से लेकर आधुनिक आचार्य रामचंद्र शुक्ल तथा जयशंकर प्रसाद जैसे प्रबुद्ध कवियों और आधुनिक युग की मीरा महादेवी ने कविता का स्वरूप स्पष्ट करते हुए अपने अपने मत व्यक्त किए हैं।