प्रकाशवीर शास्त्री वाक्य
उच्चारण: [ perkaashevir shaasetri ]
उदाहरण वाक्य
- लोग कहा करते है कि पूर्व सांसद स्व, प्रकाशवीर शास्त्री के बाद किसी व्यक्तित्व का वक्तव्य सुनकर समय ठहर जाता था तो उस व्यक्ति का नाम था “ राजीव भाई ” ।
- नेहरू जी के समय की राजनीति में पीलू मोदी, डॉ राममनोहर लोहिया, श्री मधु लिमए, श्री प्रकाशवीर शास्त्री और कांग्रेस के अन्दर श्री फिरोज गांधी अपनी बातो को द्रढता से रखते थे …
- परिमार्जित हिंदी में धाराप्रवाह भाषण देने वाले अटल बिहारी वाजपेयी और प्रकाशवीर शास्त्री जैसे स्वनामधन्य वक्ताओं से संसद वंचित होती जा रही है तो इस का कारण यही है कि देश में हम नेहरूवादी भाषा नीति के शिकार होकर रह गये हैं।
- स्व. गंगाशरण सिंह, कविवर रामधारी सिंह दिनकर, प्रकाशवीर शास्त्री और शंकरदयाल सिंह का योगदान आज याद आता है, किंतु हमारी यात्रा अभी अधूरी है, मंज़िल बहुत दूर और दु:साध्य है, पर हमें हिंदी के लिए की गई प्रतिज्ञाओं का पाथेय लेकर चलते रहना है।
- संसद के भीतर महावीर त्यागी, अटल बिहारी वाजपेयी, प्रकाशवीर शास्त्री, चंद्रशेखर और विश्वनाथ प्रताप सिंह जैसे अनेक लोग हिंदी के अच्छे वक्ता रहे पर वे अपने बलबूते हिंदी को सम्मानजनक स्थान नहीं दिला सके क्योंकि उन्होंने अंग्रेजीपरस्त नौकरशाही के ढांचे को नहीं बदला।
- नेहरू जी के समय की राजनीति में पीलू मोदी, डॉ राममनोहर लोहिया, श्री मधु लिमए, श्री प्रकाशवीर शास्त्री और कांग्रेस के अन्दर श्री फिरोज गांधी अपनी बातो को द्रढता से रखते थे और संसद के सेन्ट्रल हाल में कुछ इस तरह मिलते थे जैसे की कुछ हुआ ही ना हो.
- स् व. गंगाशरण सिंह, कविवर रामधारी सिंह दिनकर, प्रकाशवीर शास्त्री और शंकरदयाल सिंह का योगदान आज याद आता है, किंतु हमारी यात्रा अभी अधूरी है, मंज़िल बहुत दूर और दु: साध्य है, पर हमें हिंदी के लिए की गई प्रतिज्ञाओं का पाथेय लेकर चलते रहना है।
- प्रसंगवश एक अन्य तथ्य की ओर ध्यान देना आवश्यक हो जाता है कि कंस वध के बाद ही कृष्ण का यज्ञोपवीत और विद्यार्थी जीवन (ब्रह्मचर्य आश्रम) प्रारम्भ हुआ था (दशम स्कन्ध, अध्याय पैंतालीस) प्राख्यात राजनीतिज्ञ और संस्कृतविद स्वर्गीय श्री प्रकाशवीर शास्त्री ने आज से लगभग अठारह वर्ष पूर्व मथुरा से प्रकाशित होने वाले ‘
- प्रकाशवीर शास्त्री द्वारा संसद में दिए गए भाषणों का पुस्तक रूप में संकलन “राष्ट्रीयता के मुखर स्वर ' का लोकार्पण गत 21 फरवरी को नई दिल्ली में उपप्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी ने”राष्ट्रीयता के मुखर स्वर' पुस्तक का लोकार्पण करते हुए (बाएं से)श्री लालकृष्ण आडवाणी, डा. लक्ष्मीमल्ल सिंघवी तथा श्री रविशंकर प्रसादवेद प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित इस समारोह में ग्रंथ समिति के अध्यक्ष एवं सांसद डा.
- सम्मान, पुरस्कार-'व्यंग्यश्री सम्मान'-2009 कमला गोइन्का व्यंग्यभूषण सम्मान-2008 संपादक रत्न सम्मान-2006 ;हिंदी साहित्य समिति,नाथद्वारा हिन्दी निधि तथा भारतीय विद्या संस्थान; त्रिनिडाड एवं टुबैगो द्वारा विशिष्ट सम्मान-2002 अवन्तिका सहस्त्राब्दी सम्मान-2001 हरिशंकर परसाई स्मृति पुरस्कार-1997 हिंदी अकादमी साहित्यकार सम्मान-1997-98 अंतराष्ट्रीय बाल साहित्य दिवस पर 'इंडो रशियन लिट्रेरी क्लब 'सम्मान-1998 प्रकाशवीर शास्त्री सम्मान-1997 अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों साहित्य अकादमी, सांस्कृतिक संबंध् परिषद् एवं अक्षरम् के संयुक्त तत्वावधन में आयोजित कार्यक्रमों में भागीदारी।