भरतवंशी वाक्य
उच्चारण: [ bhertevneshi ]
उदाहरण वाक्य
- भावार्थ: इस नाशरहित, अप्रमेय, नित्यस्वरूप जीवात्मा के ये सब शरीर नाशवान कहे गए हैं, इसलिए हे भरतवंशी अर्जुन! तू युद्ध कर॥18॥ य एनं
- हां, न्याय की देवी के आंखों की पट्टी यदि खुल जाए तो शायद मेरे भोले भाले वनवासी, गिरिवासी व गरीव भरतवंशी का भाग्योदय संभव है।
- भावार्थ: हे भरतवंशी अर्जुन! संसार में इच्छा और द्वेष से उत्पन्न सुख-दुःखादि द्वंद्वरूप मोह से सम्पूर्ण प्राणी अत्यन्त अज्ञता को प्राप्त हो रहे हैं॥27॥
- भावार्थ: हे भरतवंशी धृतराष्ट्र! अंतर्यामी श्रीकृष्ण महाराज दोनों सेनाओं के बीच में शोक करते हुए उस अर्जुन को हँसते हुए से यह वचन बोले॥10॥
- राष्ट्ररक्षा की इसी भावना से प्रेरित होकर भरतवंशी राजाओं ने वर्ष में दो बार आने वाले नवरात्र को प्रकृति पूजा तथा राष्ट्ररक्षा के अभियान से जोड़ा।
- हे भरतवंशी अर्जुन! संसार में इच्छा और द्वेष से उत्पन्न हुए सुख-दुःखादि द्वन्द्वरूप मोह से संपूर्ण प्राणी अति अज्ञानता को प्राप्त हो रहे हैं ।
- भरतवंशी शासकों द्वारा सरस्वती, यमुना और गंगा के तट पर यज्ञ किए जाने के वर्णन से राज्य की भौगोलिक स्थिति का ज्ञान हो जाता है।
- लोकप्रियता व बाबूजी पर असीम आस्था और विश्वास का एक अन्य उदाहरण है कि सूरीनाम के एक भरतवंशी स्व॰ श्री रघुनंदन ब्रह्म तिवारी द्वारा किया गया भू-दान।
- भावार्थ: इस नाशरहित, अप्रमेय, नित्यस्वरूप जीवात्मा के ये सब शरीर नाशवान कहे गए हैं, इसलिए हे भरतवंशी अर्जुन! तू युद्ध कर॥ 18 ॥
- भवन्ति सम्पदं देवीमभिजातस्य भारत॥ तेज (प्रभाव), क्षमा, धैर्य, शरीर की शुद्धि, बैर-भाव का न रहना और मान को न चाहना, हे भरतवंशी अर्जुन।