माधो सिंह भंडारी वाक्य
उच्चारण: [ maadho sinh bhendaari ]
उदाहरण वाक्य
- सदियों पहले माधो सिंह भंडारी को भी मलेथा में अलकनन्दा से पानी लाने के लिये अपने बेटे की बलि देनी पड़ी थी और हम तो अब हर साल ऊर्जा प्रदेश बनने के नाम पर बलि देते ही जा रहे हैं अपने बेटों की अपने खेतों की, अपने जंगलों की, जिन्हें हम अपना देवता मानते हैं।
- “ गाँव चलों, हल बताओ ” उद्देश्य के साथ हिमालय बचाओ आंदोलन की 180 किलोमीटर लंबी व 15 दिवसीय यात्रा का शुभारंभ दिनांक 0 3-0 5-2013 को शिवपुरी से हो चुका है, जो दिनांक 18-0 5-2013 को माधो सिंह भंडारी की कर्मभूमि जयालगढ़ मलेथा में जाकर समाप्त होगी, यात्रा में प्रतिभाग करने के इच्छुक सज्जन यात्रा के बीच में से किसी भी स्थान पर यात्रा में सम्मिलित हो सकते है, यात्रा का कार्यक्रम इस प्रकार है:
- “मलेथा पर स्वर्गीय भोला दत्त देवरानी जी द्वारा लिखित ये दो पंक्तिया“ ”माधु की कीर्ति जस गाद गांदा, आज तै कूल तख बग़द जांद"उत्तराखंड एक तरफ़ अपनी खूबसूरती के नाम से परसिद्ध है, तो दूसरी तरफ़ यहाँ के वीर पुरुषों से भी परसिद्ध है, यहाँ के इन्ही वीर पुरुषों में से एक वीर माधो सिंह भंडारी परसिद्ध हैं, श्रीनगर गढ़वाल से लगभग ४ किलोमीटर की दूरी पर तथा देवप्रयाग से लगभग ३० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है मलेथा गाँव, अलकनंदा नदी के दहने तट पर बसा यह गाँव अपनी सुरम्यता, सौन्दर्यता से परिपूर्ण है।