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माध्वाचार्य वाक्य

उच्चारण: [ maadhevaachaarey ]

उदाहरण वाक्य

  1. माध्वाचार्य का जन्म सन् १२३८ में विजयादशमी के दिन उडुपी के निकट पजका नामक छोटे से गाँव में हुआ था।
  2. माध्वाचार्य का जन्म सन् १२३८ में विजयादशमी के दिन उडुपी के निकट पजका नामक छोटे से गाँव में हुआ था।
  3. रामानुज, माध्वाचार्य और वैष्णवाचार्यों के अनुयायी मुझे क्षमा करें, यदि मैं कहँू कि उन्होंने भारत में कूप मंडूकता के प्रचार में बड़ी सरगर्मी दिखायी।
  4. शंकराचार्य ने उसी गीता के आधार पर आत्मा और परमात्मा को एक (अद्वैत) सिद्ध किया, जबकि माध्वाचार्य ने आत्मा और परमात्मा को भिन्न (द्वैत) सिद्ध किया।
  5. माध्वाचार्य सामने प्रकट होने का आग्रह करने लगे तो भैरव ने इतना ही कहा कि गायत्री उपासना से उत्पन्न आपके ब्रह्मतेज के सम्मुख मेरा प्रकट होना बन नहीं पा रहा है।
  6. दार्शनिक माध्वाचार्य विद्यारण्य द्वारा लिखित भारतीय दर्शन के सारग्रन्थ सर्वदर्शन सग्रंह मे लिखे लोकायत के विवरण पर एक नजर डालने पर भौतिकवादियों के प्रति उनकी घृणा का हम स्पष्ट अवलोकन कर सकते हैं।
  7. दार्शनिक माध्वाचार्य विद्यारण्य द्वारा लिखित भारतीय दर्शन के सारग्रन्थ सर्वदर्शन सग्रंह मे लिखे लोकायत के विवरण पर एक नजर डालने पर भौतिकवादियों के प्रति उनकी घृणा का हम स्पष्ट अवलोकन कर सकते हैं।
  8. लगभग ढ़ाई हजार वर्ष पूर्व अद्वैतवाद जतगगुरु शंकराचार्य को, आठवीं-नवीं शताब्दी में द्वैतवादी जगतगुरु निम्बाकाचार्य को, 12 वीं शताब्दी में विशिष्ठाद्वैतवादी जगतगुरु रामानुजाचार्य को एवं लगभग 14 वीं शताब्दी में द्वैतवादी जगतगुरु माध्वाचार्य को।
  9. यह अद्वेतमत के सन्यासी और माध्वाचार्य के दीक्षा गुरु थे, माध्वाचार्य ने ग्यारह वर्ष की अवस्था में सनककुलोद्वभव अच्युतपक्षाचार्य नामान्तर में शुद्धानन्द से दीक्षा ली थी,सन्यास लेकर इन्होने गुरु के पास ही वेदान्त पढना आरम्भ कर दिया था,किन्तु गुरु की व्याख्या से इनको संतोश नही होने के कारण वे इनसे प्रतिवाद करने लगते थे,कहते है कि माध्वाचार्य के प्रभाव से इनके गुरु अच्युतपक्षाचार्य भी बाद में द्वेतवादी वैष्णव हो गये थे.
  10. यह अद्वेतमत के सन्यासी और माध्वाचार्य के दीक्षा गुरु थे, माध्वाचार्य ने ग्यारह वर्ष की अवस्था में सनककुलोद्वभव अच्युतपक्षाचार्य नामान्तर में शुद्धानन्द से दीक्षा ली थी,सन्यास लेकर इन्होने गुरु के पास ही वेदान्त पढना आरम्भ कर दिया था,किन्तु गुरु की व्याख्या से इनको संतोश नही होने के कारण वे इनसे प्रतिवाद करने लगते थे,कहते है कि माध्वाचार्य के प्रभाव से इनके गुरु अच्युतपक्षाचार्य भी बाद में द्वेतवादी वैष्णव हो गये थे.
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