रासो काव्य वाक्य
उच्चारण: [ raaso kaavey ]
उदाहरण वाक्य
- इसके आधार पर जब हम विवेच्य रासो काव्यों को परखते हैं तो इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि ये सभी रासो काव्य खण्ड काव्य हैं।
- कई ऐसे रासो काव्य हैं जिन्हें सामने रख दिया जाए तो हिन्दी जानने का दावा करने वाले अच्छे अच्छों को अपनी औक़ात समझ में आ जाए।
- उलटे, उन्होंने अपने रासो काव्य के मुखबंध में इस बात पर नाज किया है किमै अपने काव्य में पुराण और कुरान, दोनों के मंतव्यों का समावेश कर रहा हूं.
- जिसमें चरित्र काव्य, सिद्ध और नाथों का काव्य, भाट और चारणों के युद्ध से सबंधित वीर काव्य, रासो काव्य, भक्ति काव्य तथा श्राृंगारिक काव्य की परंपरा रही है।
- अपभ्रंश की यह परम्परा गुजराती साहित्य से होती हुई राजस्थानी साहित्य एवं बाद में हिन्दी साहित्य में प्रचलित हुई अतः हिन्दी में रासो काव्य परम्परा का प्रचलन गुजराती साहित्य से प्रारम्भ हुआ।
- इस समय दरम्यान अनेक महत्वपूर्ण कवियों ने अपनी रचनाएं की हैं जिनमें जैन अपभ्रंश साहित्य, बौद्ध एवं नाथ साहित्य, डिंगल और पिंगल भाषा के ग्रंथ, चारण साहित्य तथा रासो काव्य का प्राधान्य रहा है।
- ज्ञ् रासो तो आपने पढ़ा ही होगा? कई ऐसे रासो काव्य हैं जिन्हें सामने रख दिया जाए तो हिन्दी जानने का दावा करने वाले अच्छे अच्छों को अपनी औक़ात समझ में आ जाए।
- रासो काव्य में संस्कृत से अपभ्रंश काव्य तक की परंपरागत काव्यरूढ़ियों का भी प्रभाव दिखाई देता है परंतु इनमें जिन लोकप्रचलित किंवदंतियों का समावेश हुआ है वे अभिजात साहित्य और पुराणों की परंपरा से भिन्न हैं।
- इस समय दरम्यान अनेक महत्वपूर्ण कवियों ने अपनी रचनाएं की हैं जिनमें जैन अपभ्रंश साहित्य, बौद्ध एवं नाथ साहित्य, डिंगल और पिंगल भाषा के ग्रंथ, चारण साहित्य तथा रासो काव्य का प्राधान्य रहा है।
- नारी-विमर्श की यह करवट हमें हिन्दी सूफी कवियों ने अपनी रचनाओं के रचनातंत्रा के कथा सूत्रों के माध्यम से नारी-जीवन की पीड़ाओं को स्पष्ट रूप से उभारा और उसे आदिकालीन साहित्य में अभिव्यक्त नारी-विमर्श सम्बन्धी उस काव्य-चेतना से जोड़ा जो रासो काव्य में दबे स्वर में दिखाई दे रही थी।