विजयलक्ष्मी पण्डित वाक्य
उच्चारण: [ vijeyleksemi pendit ]
उदाहरण वाक्य
- 4-श्रीमती विजयलक्ष्मी पण्डित की मुलाकात 1948 में रूस में नेता जी सुभाष चन्द्र बोस से हुई थी! उस समय वे भारत की विदेश मंत्री थी! शांताक्रूज हवाई अड्डे पर उन्होंने यह घोषणा की थी कि वह भारतवासियों के लिए एक अच्छी खबर लाई हैं परन्तु नेहरू जी के दबाव में आकर उन्होंने जीवनभर अपनी जबान नहीं खोली!
- सुभाष चंद्र बोस · लाला लाजपत राय · विपिन चन्द्र पाल · जयप्रकाश नारायण · सरदार वल्लभ भाई पटेल · मदनमोहन मालवीय · विजयलक्ष्मी पण्डित · सुशीला दीदी · गणेशशंकर विद्यार्थी · भगवान दास · बिरसा मुंडा · ख़्वाजा नजीमुद्दीन · चक्रवर्ती राजगोपालाचारी · बिधान चंद्र राय · एनी बेसेंट · सुभद्रा कुमारी चौहान · दादा भाई नौरोजी · जगजीवन राम · अनन्त हरि मित्र · राम
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- सुखदेव · सुभाष चंद्र बोस · लाला लाजपत राय · विपिन चन्द्र पाल · जयप्रकाश नारायण · सरदार वल्लभ भाई पटेल · मदनमोहन मालवीय · विजयलक्ष्मी पण्डित · सुशीला दीदी · गणेशशंकर विद्यार्थी · भगवान दास · बिरसा मुंडा · ख़्वाजा नजीमुद्दीन · चक्रवर्ती राजगोपालाचारी · बिधान चंद्र राय · एनी बेसेंट · सुभद्रा कुमारी चौहान · दादा भाई नौरोजी · जगजीवन राम · अनन्त हरि मित्र · राम
- संयुक्त राष्ट्रसंघ के समक्ष तत्कालीन हिंदुस्तानी प्रतिनिधिमण्डल की नेता श्रीमती विजयलक्ष्मी पण्डित की आवाज में आवाज मिलाकर जब पाकिस्तानी प्रतिनिधिमण्डल के नेता विदेश मन्त्री जफ़रुल्ला खां, अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत एम. ए. एच. इरफ़ानी ने भी दक्षिण अफ़्रीका में भारतीयों पर अत्याचार का विरोध किया, तब गांधीजी अत्यन्र्त प्रसन्न हुए और १६ नवंबर ‘४७ को प्रार्थना में उन्होंने यह कहा, ‘ हिंदुस्तान(अविभाजित) के हिंदू और मुसलमान विदेशों में रहने वाले हिंदुस्तानियों के सवालों पर दो राय नहीं हैं, इससे साबित होता है कि दो राष्ट्रों का उसूल गलत है ।
- संयुक्त राष्ट्रसंघ के समक्ष तत्कालीन हिंदुस्तानी प्रतिनिधिमण्डल की नेता श्रीमती विजयलक्ष्मी पण्डित की आवाज में आवाज मिलाकर जब पाकिस्तानी प्रतिनिधिमण्डल के नेता विदेश मन्त्री जफ़रुल्ला खां, अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत एम. ए. एच. इरफ़ानी ने भी दक्षिण अफ़्रीका में भारतीयों पर अत्याचार का विरोध किया, तब गांधीजी अत्यन्र्त प्रसन्न हुए और १६ नवंबर '४७ को प्रार्थना में उन्होंने यह कहा, ' हिंदुस्तान(अविभाजित) के हिंदू और मुसलमान विदेशों में रहने वाले हिंदुस्तानियों के सवालों पर दो राय नहीं हैं, इससे साबित होता है कि दो राष्ट्रों का उसूल गलत है ।