विजय आनन्द वाक्य
उच्चारण: [ vijey aanend ]
उदाहरण वाक्य
- *क्या उन्होंने ताहिर हुसैन की ' दुल्हा बिकता है' में भी काम किया है?-हाँ, साथ ही 'अंकुश', 'लॉकेट', विजय आनन्द की 'हम रहे न हम' और सुभाष घई की फिल्म 'मेरी जंग' में मेहमान कलाकार की भूमिका भी निभाई है।
- मध् य प्रदेश के बैतूल जिला मजिस्ट्रेट विजय आनन्द कुरील के न्यायालय में राज्य सुरक्षा कानून के तहत चल रहे पत्रकार रामकिशोर पवांर के बहुचर्चित मामलें में गवाही के दौरान अधिवक्ता भारत सेन ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी पत्रकारिता जैसे महत्वपूर्ण विषय को समझते ही नही हैं।
- सिने-जगत में इस फ़िल्म का प्रभाव इस क़दर गहरा था कि सन १ ९ ६ ० में रिलीज़ हुई ' कालाबाज़ार ' (निर्देशक: विजय आनन्द) में देव आनन्द को ' मदर इन्डिया ' के शो के टिकट ब्लैक करते हुए दिखाया गया.
- राज खोसला के निर्देशन में आशा पारिख ने दो बदन (मनोज कुमार), चिराग (सुनील दत्त), मैं तुलसी तेरे आंगन (विजय आनन्द, नूतन) जैसी फिल्मों में काम किया जिन्होंने उन्हें हिन्दी फिल्मों में एक संजीदा अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया।
- जया भादुडी (बच्चन) और विजय आनन्द पर फ़िल्माए गए इस गीत के बोल है-रूठे रूठे पिया मनाऊँ कैसेआज न जाने बात हुई वो क्यों रूठे मुझसेजब तक वो बोले न मुझसे मैं समझूँ कैसे रूठे रूठे पिया, पिया आ आ आ आरूठे रूठे पिया मनाऊँ कैसेरूठे रूठे पियावो बैठे है कुछ ऐसे शादी में दुल्हन जैसेक्या बन के दूल्हा मैं
- विजय आनन्द निर्देशक हों, एस डी बर्मन संगीत निर्देशक हों, नीरज गीत लिख रहे हों और गीत को लता और किशोर ने अपनी सुरीली गायिकी प्रदान की हो और उस गीत को पर्दे पर देव आनन्द और मुमताज़ जैसे अभिनेता प्रस्तुत कर रहे हों तो वह गीत परदे पर सिनेमा का जादू क्या होता है उसे साबित करता है।
- मौखिक साक्ष्य के रूप में अभियोजन पक्ष की ओर से पी0 डब्लू0-1 श्री शम्भू नाथ वादी मुकदमा, पी0 डब्लू0-2 डा0 टी0 के0 झा, पी0 डब्लू0-3 श्री राजेश कुमार केशरवानी, पी0 डब्लू0-4 एच. सी. पी. नेत्रपाल सिंह, पी0 डब्लू0-5 उप निरीक्षक विजय आनन्द शाही विवेचक द्वितीय, पी0 डब्लू0-6 उप निरीक्षक सुनील कुमार राय विवेचक प्रथम और पी0 डब्लू0-7 डा0 एम0 के0 भाटिया को परीक्षित कराया गया है।
- खोल दो अपने पंख मेरे साथ उड़ना है मुक्त आकाश में छितिजों के आर पार नए-नए संदर्भों से मुक्त मन जुड़ना है दुराशा, क्षोभ, दुःख, प्रवंचना के अंधकार को छोड़ व्यामोह, कलुष जीवन से नाता तोड़ प्राण में आशा और विश्वास का मंत्र लिए विजय आनन्द गीत गाते, जन-जन में समवेत स्वरों से यह अहसास जगाते हुए कि हमें नई ऊंचाइयों से जुड़ना है खोल दो पंख अपने असीम में आत्म विश्वास लिए स्वच्छन्द उड़ना है।