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समवाय सम्बन्ध वाक्य

उच्चारण: [ semvaay sembendh ]

उदाहरण वाक्य

  1. शरीर में समवाय सम्बन्ध से ज्ञान की उत्पत्ति में तादात्म्य सम्बन्ध से शरीर कारण है, ऐसा कार्यकारण भाव ज्ञान एवं शरीर के मध्य चार्वाक को अभिमत है।
  2. वैशेषिक संसार का तत्त्वमीमांसीय दृष्टिकोण से आकलन करते हैं, जबकि नैयायिक ज्ञानमीमांसीय दृष्टिकोण से न्याय और वैशेषिक दोनों में समवाय सम्बन्ध को स्वीकार करते हैं किन्तु नैयायिक उसको प्रत्यक्षगम्य मानते हैं, जबकि वैशेषिकों के अनुसार यह प्रत्यक्षगम्य नहीं है।
  3. वैशेषिक संसार का तत्त्वमीमांसीय दृष्टिकोण से आकलन करते हैं, जबकि नैयायिक ज्ञानमीमांसीय दृष्टिकोण से न्याय और वैशेषिक दोनों में समवाय सम्बन्ध को स्वीकार करते हैं किन्तु नैयायिक उसको प्रत्यक्षगम्य मानते हैं, जबकि वैशेषिकों के अनुसार यह प्रत्यक्षगम्य नहीं है।
  4. कणाद के अनुसार समवाय सम्बन्ध से द्रव्य में आश्रय लेने का जिसका स्वभाव हो, जो स्वयं गुण का आश्रय न हो, संयोग और विभाग का कारण न हो और अन्य किसी की अपेक्षा न रखता हो, वह गुण नामक पदार्थ है।
  5. ' भूतल पर जल नहीं है ', इस प्रतीति में घटाभाव से विशिष्ट भितल का ग्रहण होता है इसमें घटाभाव विशेषण है, भूसल विशेष्य है तथा इन दोनों के बीच का संबंध वशिष्ट्य इग्र् यथार्थ प्रतीति में गृहीत इस सम्बन्ध को यदि वस्तुत: नहीं माना जाता तो समवाय सम्बन्ध को वरतुसत् मानने के लिए भी कोई आधार न रह जायेगा।
  6. वैशेषिक सूत्रकार कणाद ने पृथ्वी, जल, तेज और वायु की परिभाषा मुख्यत: उनमें समवाय सम्बन्ध से विद्यमान प्रमुख गुणों के आधार पर सकारात्मक विधि से की, किन्तु आकाश की परिभाषा का अवसर आने पर कणाद ने आरम्भ में नकारात्मक विधि से यह कहा कि आकाश वह है * जिसमें रूप, रस, गन्ध और स्पर्श नामक गुण नहीं रहते।
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