सरल चेतना वाक्य
उच्चारण: [ serl chetenaa ]
उदाहरण वाक्य
- लेकिन सरल चेतना पत्रिका के माध्यम से और अब जालघर के सहयोग से हमारा यह प्रयास है कि महान व्यक्तित्व के धनी, क्रान्तिकारियों के गुणगान करने और देशसेवा का व्रत लेने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महाकवि श्रीकृष्ण सरल को भारत में रहने वालों के अतिरिक्त प्रवासी भारतीय भी जान सकें और उनकी कालजयी देशभक्तिपूर्ण कविताओं को पढ़ सकें।
- (जिलाधिकारी होशंगाबाद को सरल चेतना की प्रति भेँट करते हुए श्री सन्तोष व्यास) भगतसिंह का प्रश्न सुलगती डबडबाई आंखें तड़पती आवाज़ सुलगता हुआ अंदाज़ रात सपने में बोला शहीदे आज़म सौगंध है भारत माँ की दिल में एक रही झांकी केवल आजादी की आशिकी और इसके लिए ही खाई फांसी हम सबका मस्तक ऊँचा उठाने कि गुलाम न रहे मेरे देश के मस्ताने पर क्यों?
- याद जो आता रहा आओ चलो पूछें उसी से प्रीत के इस पंथ पर भी भूलने की रीत क्यूं है फिर मिलन की आस लेकर; स्वप्न का विन्यास लेकर कौन मन समझा रहा है दूर कोई जा रहा है नूतन वर्ष भोर की उजास हो मन में उल्लास हो ग़म का प्रवास हो खत्म ना मधुमास हो विजय हर संर्घष करें हो जीवन में उत्कर्ष मंगलमय हो आपका आगामी नूतन वर्ष! सरल चेतना के पाठकों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामना-हेमंत रिछारिया 'संपादक' सरल-चेतना जाग तुझे है दूर जाना...