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सर्वानुक्रमणी वाक्य

उच्चारण: [ servaanukermeni ]

उदाहरण वाक्य

  1. सर्वानुक्रमणी के प्रणेता कात्यायन ने ग्रंथारंभ में “यथोपदेश मैं ऋग्वेद की ऋचाओं के प्रतीक आदि की अनुक्रमणी प्रस्तुत करता हूँ” ऐसी प्रतिज्ञा की है।
  2. कात्यायन की ‘ सर्वानुक्रमणी ‘ या ‘ सर्वानुक्रमणिका ‘ इन ऋषियों के नामों का मूल स्त्रोतमानी गयी है (कुछ अन्य अनुक्रमणियों के अलावा।
  3. लेकिन यह दलील देकर प्रश्नों से बचा नहीं जा सकता, यदि आप सर्वानुक्रमणी को विश्वसनीय नहीं मानते तो उसका सन्दर्भ देते ही क्यों हैं?
  4. ऋग्वेद से संबद्ध “अनुक्रमणी साहित्य” में, विशेषत: बृहद्देवता और सर्वानुक्रमणी में, निरुक्त, नीतिमंजरी और सायण भाष्य में इन आख्यानों को विस्तृत घटनाओं का भी वर्णन हुआ है।
  5. ऋग्वेद से संबद्ध “अनुक्रमणी साहित्य” में, विशेषत: बृहद्देवता और सर्वानुक्रमणी में, निरुक्त, नीतिमंजरी और सायण भाष्य में इन आख्यानों को विस्तृत घटनाओं का भी वर्णन हुआ है।
  6. इसीलिए तैत्तरीय संहिता, ऐतेरय ब्राह्मण, काण्व संहिता, शतपथ ब्राह्मण एवं सर्वानुक्रमणी में मंत्रों के दृष्टाओं को ही ऋषि नाम से सम्बोधित किया गया है तथा अनेक प्रमाण दिए हैं।
  7. ९ ८ को देखें तो उस में-‘ च ‘ (और) का प्रयोग मिलेगा, जहाँ सर्वानुक्रमणी में कात्यायन ‘ वा ‘ का प्रयोग करते हैं।
  8. सर्वानुक्रमणी में ऋग्वेद ९. ६६-‘ पवस्व ‘ सूक्त के १ ०० ‘ वैखानस ‘ ऋषि हैं, जबकि सूक्त में मन्त्र ही केवल ३ ० हैं।
  9. इसीलिए तैत्तरीय संहिता, ऐतेरय ब्राह्मण, काण्व संहिता, शतपथ ब्राह्मण एवं सर्वानुक्रमणी में मंत्रों के दृष्टाओं को ही ऋषि नाम से सम्बोधित किया गया है तथा अनेक प्रमाण दिए हैं।
  10. सर्वानुक्रमणी (परिभाषा २. ४) में स्पष्ट रूप से मन्त्र का ‘ दृष्टा ‘ या मन्त्र के अर्थ का ‘ ज्ञाता ‘ ही, उस का “ ऋषि ” है।
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