हब्बा खातून वाक्य
उच्चारण: [ hebbaa khaatun ]
उदाहरण वाक्य
- मनोहर · होलराय · शहज़ादा दानियाल · शहज़ादा परवेज़ · दाबर बख़्श · बहादुरपुर का युद्ध · शेर अफ़ग़ान · दीन-ए-इलाही · हब्बा खातून · शाह शुजा · ख़ुसरो मिर्ज़ा
- ादा दानियाल · मुर्शिद कुली ख़ाँ · शहज़ादा परवेज़ · दाबर बख़्श · बहादुरपुर का युद्ध · शेर अफ़ग़ान · दीन-ए-इलाही · हब्बा खातून · शाह शुजा · ख़ुसरो मिर्ज़ा · बिहारीमल
- यहाँ ललद्येद, अंदाल, अक्का महादेवी, मीरा, ताज, हब्बा खातून, अरणिमाल जैसी सैकड़ों भक्त कवयित्रियाँ शाश्वत से नेह लगाती, उसी पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करती और इस जरिए अजाने अपनी पहचान अपना ‘ स्व ' भी अर्जित करती दिखती हैं ।
- वही जो कभी हमारे देश में मीरा की थी, वही जो हब्बा खातून की थी, ना जाने कितनी स्त्रियों को जो अपने दीमाग को मर्दों की तरह इस्तेमाल करने लगती हैं, जो मर्दों के लिए निर्धारित सीमा रेखा के भीतर घुसने की कोशिश करती हैं।
- भारतीय साहित्य में कवयित्रियों की सुदीर्घ और समृद्ध परम्परा रही हैं-घोषा, विज्जका, अक्क महादेवी, मीरा, गोदा, मोलम्मा, तोरूदत्त, सरोजिनी नायडू, लल्लद्यद, हब्बा खातून, चन्द्रसखी, अन्दाल, मुक्ताबाई, जनाबाई, माधवी दासी इत्यादि, जिनके साथ महादेवी का तुलनात्मक अध्ययन करणीय है।
- जब कविता मिली तो मुझे लगा यह एक पुकार है वही पुकार जो कभी हमारे देश में मीरा की थी, वही जो हब्बा खातून की थी, और ना जाने कितनी स्त्रियों की, जो अपने दिमाग का मर्दों की तरह इस्तेमाल करने लगती है, जो मर्दों के लिए निर्धारित सीमा रेखा के भीतर घुसने की कोशिश करती है ।
- वे अपने साथ कष्मीरी भाशा के आधुनिक कवि ' 'षायरे कष्मीर महजूर‘‘ एवं कवयित्री हब्बा खातून की कविता की परम्परा के साथ साथ और भी पीछे चले तो संस्कृत के 'राजतरंगिणी‘ वाले कल्हण की कविता की परम्परा को लेकर हिन्दी कविता में अपनी स्थानीयता के साथ उपस्थित होते हैं, एवं राश्ट्रीय मानस को न सिर्फ विस्तारित करते हैं, बल्कि उसे वैष्विक कविता से जोडते हैं।