होराशास्त्र वाक्य
उच्चारण: [ horaashaasetr ]
उदाहरण वाक्य
- वृहद् पराशर होराशास्त्र के अनुसार जिनकी कुण्डली में पाप ग्रह यानी सूर्य, मंगल, शनि, राहु बारहवें घर में हो अथवा बारहवें घर का स्वामी सूर्य के साथ हो वह मृत्यु के बाद नरकगामी होता है।
- बृहद् पाराशर होरा शास्त्र, जैमिनी सूत्र, बृहज्जातक, सारावली, जातकाभरण, दैवज्ञाभरण, फलदीपिका, प्रश्न मार्ग, कृष्णीयम्, माधवीयम् एवं मानसागरी जैसे होराशास्त्र के मानक या निबंध ग्रंथों में कालसर्प योग की चर्चा नहीं मिलती।
- बृहत पाराशर होराशास्त्र में उल्लेख है कि जिस समय जो ग्रह प्रतिकूल हो उस समय जातक उस ग्रह का यत्नपूर्वक पूजन करे, क्योंकि ब्रह्मा ने ग्रहों को आदेश दिया है कि जो व्यक्ति उनकी पूजा करे, उसका वे कल्याण करें।
- तब इसी स्थिति में बनने वाले काल सर्प योग का फल क्या होगा? महर्षि पराशर के अलावा होराशास्त्र के अधिकांश आचार्यों न े कडंु ली क े भाव 3, 6 एव ं 11 मंे राहु को अरिष्ट नाशक बतलाया है।
- बृहद् पराशर होराशास्त्र में लिखा है कि जिनकी कुण्डली में बारहवें स्थान में शुभ ग्रह बैठें हों और बारहवें भाव का स्वामी अपनी राशि अथवा मित्र की राशि में हों एवं उन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो ऐसा व्यक्ति अपने सद्कर्मों से मोक्ष प्राप्त करता है।
- मोक्ष प्राप्ति योग बृहद् पराशर होराशास्त्र में लिखा है कि जिनकी कुण्डली में बारहवें स्थान में शुभ ग्रह बैठें हों और बारहवें भाव का स्वामी अपनी राशि अथवा मित्र की राशि में हों एवं उन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो ऐसा व्यक्ति अपने सद्कर्मों से मोक्ष प्राप्त करता है।
- ५-अनुभव के आधार पर यही तथ्य सामने आता है कि राहू या केतु जिस भी राशि में हो, जिस भाव में हो उससे संबंधित विषय वस्तुओ पर पाना कुप्रभाव अवश्य डालता है |यहाँ यह शंका जन्म लेती है कि फिर पराशर होराशास्त्र में महर्षि पराशर ने राहू को शुभ फल दायक (योगकारक)