अजितनाथ वाक्य
उच्चारण: [ ajitenaath ]
उदाहरण वाक्य
- इसी जिनालय के नीचे तलघर में वेदिका पर अजितनाथ भगवान की प्राचीन प्रतिमा विराजमान है एवं मंदिर के सामने नगाड़खाने में ऊपर वेदिका पर पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान है।
- यह अयोध्या नगरी का पुण्य प्रताप ही है कि सूर्यवंशी राजाओं के साथ-साथ यह पाँच जैन तीर्थकारों-ऋषभदेव, अजितनाथ, संभवनाथ, अभिनंदननाथ और सुमतिनाथ-की भी जन्मस्थली बनी।
- लगभग दसवीं शताब्दी की ये प्रतिमाएं क्षेत्रपाल, पार्श्वनाथ जैन तीर्र्थकर (काले पत्थर पर बैठे हुए), अंबिका, आदिमनाथ, अजितनाथ, गौमेद एवं अम्बिका तथा नेमीनाथ की है।
- इस परंपरा में श्रीरुद्र न्यायवाचस्पति का “पिकदूत”, “वादिराज” का “पवनदूत”, “हरिदास” का “कोकिलदूत”, सिद्धनाथ विद्यावागीश का “पवनदूत” कृष्णनाथ न्यायपंचानन का “वातदूत”, अजितनाथ न्यायरत्न का “बकदूत”, रघुनाथ दास का “हंस दूत” आदि रचनाएँ हैं।
- उत्तरपुराण में द्वितीय तीर्थंकर श्री अजितनाथ से लेकर अन्तिम तीर्थंकर महावीर तक 23 तीर्थंकरों, भरत को छोड़कर शेष 11 चक्रवर्तियों, 9 बलभद्रों, 9 नारायणों और 9 प्रतिनारायणों का चरित्र चित्रण है।
- जिस तरह सूर्य से कमल-वन आनन्दित होता है, उसी तरह जिस से यह सारा जगत् आनन्दित है, जिसके केवल क्षान रूपी निर्मल दर्पण में सारे लोकों का प्रतिबिम्ब पङता है, उस अजितनाथ प्रभु की स्तुति करते है।
- तीर्थंकर जैन धर्म मे 24 तीर्थंकरों को माना जाता है | 1 ऋषभदेव जी इन्हें आदिनाथ भी कहा जाता है 2 अजितनाथ जी 3 सम्भवनाथ जी 4 अभिनंदन जी 5 सुमतिनाथ जी 6 पद्ममप्रभु जी 7 सुपाश्वॅनाथ जी 8 चंदाप्रभु जी 9 सुविधिनाथ जी इन्हें पुष्पदन्त भी कहा जाता है 10
- इस परंपरा में श्रीरुद्र न्यायवाचस्पति का “ पिकदूत ”, “ वादिराज ” का “ पवनदूत ”, “ हरिदास ” का “ कोकिलदूत ”, सिद्धनाथ विद्यावागीश का “ पवनदूत ” कृष्णनाथ न्यायपंचानन का “ वातदूत ”, अजितनाथ न्यायरत्न का “ बकदूत ”, रघुनाथ दास का “ हंस दूत ” आदि रचनाएँ हैं।
- १: ऋषभदेव जी २: अजितनाथ जी ३: सँभवनाथ ४: अभिनन्दन जी ५: सुमतिनाथ जी ६: पद्मप्रभु जी ७: सुपार्श्वनाथ जी ८: चन्द्रप्रभु जी ९: सुविधिनाथ जी १०: शीतलनाथ जी ११: श्रेयांसनाथ जी १२: वासुपुज्य जी १३: विमलनाथ जी १४: अनन्तनाथ जी १५:
- १: ऋषभदेव जी २: अजितनाथ जी ३: सँभवनाथ ४: अभिनन्दन जी ५: सुमतिनाथ जी ६: पद्मप्रभु जी ७: सुपार्श्वनाथ जी ८: चन्द्रप्रभु जी ९: सुविधिनाथ जी १०: शीतलनाथ जी ११: श्रेयांसनाथ जी १२: वासुपुज्य जी १३: विमलनाथ जी १४: अनन्तनाथ जी १५: धर्म