अश्विनी कुमार पंकज वाक्य
उच्चारण: [ ashevini kumaar penkej ]
उदाहरण वाक्य
- अश्विनी कुमार पंकज की यह कविता उन लोगों के लिए जो यह मान रहे हैं कि ‘ न्याय ' का फैसला ठोस सबूतों से नहीं ‘ आस्था ' से होना चाहि ए.
- भूत का बयान-अश्विनी कुमार पंकज सदिZयों की ठंढ को चीरती हुई धूप जैसे अचानक आ धमकती है, वैसे ही सामने वालों के मुरझाये चेहरों पर अब खुशी झलकने लगी थी।
- अश्विनी कुमार पंकज ♦ जिस रात रोजी के घर पर हमला हुआ और उसे व उसके पूरे परिवार को जला कर मार डालने की कोशिश की गयी, वह बच कर निकल भागने में कामयाब रही।
- इसी संदर्भ को आगे बढाते हुए रांची से वरिष्ठ रंगकर्मी एवं आदिवासी मामलों के जाने माने लेखक श्री अश्विनी कुमार पंकज नें लिखा है कि “ पुस्तकों का रखरखाव और पुस्तकालय का संचालन बहुत मुश्किल काम है।
- दलित आदिवासी रंगमंच को एकजुट कर नये रंगभाषा के सवाल पर बहस को नया मुकाम प्रदान करने वाले अखड़ा के सलाहकार अश्विनी कुमार पंकज सवाल उठाते हैं कि नयी रंगभाषा को आज के वैज्ञानिक युग में अत्यंत ही संवेदनशील होकर विचार करने की जरूरत है।
- (निरुपमा कांड के खिलाफ मशहूर संस्कृतिकर्मी अश्विनी कुमार पंकज की कविता) देहरी लांघो लेकिन धर्म नहीं क्योंकि यही सत्य है पढ़ो खूब पढ़ो लेकिन विवेक को मत जागृत होने दो क्योंकि यही विष (शिव) है हँसो जितना जी चाहे जिसके साथ जी चाहे पर उसकी आवाज से देवालयों...
- अश्विनी कुमार पंकज ♦ सौ साल के सिनेमा को भारत के दलित, आदिवासी और स्त्री उसी तरह से खारिज करते हैं, जिस तरह से मार्लोन ब्रांडो ने अमेरिकन आदिवासियों के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ ऑस्कर अवार्ड ठुकराते हुए रंगभेदी हॉलीवुड को खारिज किया था।
- (निरुपमा कांड के खिलाफ मशहूर संस्कृतिकर्मी अश्विनी कुमार पंकज की कविता) देहरी लांघो लेकिन धर्म नहीं क्योंकि यही सत्य है पढ़ो खूब पढ़ो लेकिन विवेक को मत जागृत होने दो क्योंकि यही विष (शिव) है हँसो जितना जी चाहे जिसके साथ जी चाहे पर उसकी आवाज से देवालयों
- अश्विनी कुमार पंकज ♦ कोई अगर यह कहता है कि भोजपुर, मगध या बिहार के अन्य रंगकर्मियों व नाट्य संस्थाओं ने ग्रांट पाने के लिए आवेदन ही नहीं किया होगा, या वे पात्रता ही नहीं पूरी करते होंगे, तो यह बात समझ से परे है।
- अश्विनी कुमार पंकज ♦ देहरी लांघो लेकिन धर्म नहीं क्योंकि यही सत्य है पढ़ो खूब पढ़ो लेकिन विवेक को मत जागृत होने दो क्योंकि यही विष (शिव) है हंसो जितना जी चाहे जिसके साथ जी चाहे पर उसकी आवाज से देवालयों की मूर्तियों को खलल न पड़े क्योंकि यही सुंदर है