इंद्रभूति वाक्य
उच्चारण: [ inedrebhuti ]
उदाहरण वाक्य
- लेकिन डा. जे. पी. सिंहदेव ने ‘‘ कल्ट आफ जगन्नाथ ‘‘ में लिखा है कि ‘ सिंदूरगिरि से मूर्ति को पुरी ले जानेवाले विद्यापति नहीं थे बल्कि उसे ले जाने वाले प्रसिद्ध तांत्रिक इंद्रभूति थे।
- प्रमुख पंडित इंद्रभूति को जब मालूम हुआ, कि नगर के बाहर सर्वज्ञ महावीर आये हैं और उन्हीं के समवसण में, ये देव गण जा रहें हैं, तो उनके मन मे अपने पांडित्य का अहंकार जाग्रत हो उठा।
- भगवान की शांत मुद्रा एवं तेजस्वी मुख-मण्डल को देखकर तथा उनकी अमृत वाणी का पान करने से इंद्रभूति के सब अन्तरंग संशयों का छेदन हो गया और वे उसी समय अपने शिष्यों सहित भगवान के चरणों में दीक्षित हो गये।
- जैन काल: महावीर 24 वे तीर्थंकर थे / कैवल्य प्राप्त के बाद इंद्रभूति गौतम बने / बाद में वे गौतम स्वामी कहलाये / प्रथम शिष्य गणधर थे / स्वयं ही गुरु बन गये / इस प्रकार जैनिज्म के लिए यह गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाये जाने लगा /
- तत्कालीन साहित्य के अध्ययन से मैं इस निश्कर्श में पहुंचा हूं कि इंद्रभूति नाम का व्यक्ति जिस नीलमाधव की मूर्ति को संबलपुर की पहाड़ी में रखकर तांत्रिक सिद्धि किया करता था उसे वह शिवरीनारायण से उठाकर ले गया था और उसकी तीसरी पीढ़ी के लोग पुरी में स्थापित कर तांत्रिक सिद्धियां करने लगे।
- डॉ. जे. पी. सिंहदेव और डॉ. एल. पी. साहू ने “कल्ट ऑफ जगन्नाथ“ और ”कल्चरल प्रोफाइल ऑफ साउथ कोसला“ में लिखते हैं-”भगवान नीलमाधव की मूर्ति को शबरीनारायण से पुरी लाने वाला पुरी के राजपुरोहित विद्यापति नहीं थे बल्कि उन्हें तांत्रिक इंद्रभूति ने संभल पहाड़ी की एक गुफा में ले जाकर उसके सम्मुख बैठकर तंत्र मंत्र की साधना किया करता था।