उद्योगपर्व वाक्य
उच्चारण: [ udeyogaperv ]
उदाहरण वाक्य
- यदि सिर्फ गुरु या पुरोहित होने मात्र से हर हालत में पूजन, प्रणाम की योग्यता व अधिकार माना जाता तो महाभारत के उद्योगपर्व में परशुराम के साथ युद्ध करते समय भीष्म परशुराम के प्रति यह क्यों कहते हैं कि:
- यदमित्रान् वशे कृत्वा क्षत्रियः सुखमेधते मन्युना दह्यमानेन पुरूषेण मनस्विना, निकृतेनेह बहुशः शत्रून प्रति जिगीषया आत्मानं वा परित्यज्य शत्रुं वा विनिपात्य च, अतोऽन्येन प्रकारेण शन्तिरस्य कुतो भवेत् इह प्राज्ञों हि पुरूषः स्वल्पमप्रियमिच्छति, यस्य स्वल्प प्रियं लोके ध्रुवं तस्याल्पमप्रियम् (महाभारत, उद्योगपर्व, 135-13 से 17 तक) अर्थात हे संजय, क्षत्रिय जाति इस संसार में युद्ध और विजय के लिए ही रची गई है ।