काशीखण्ड वाक्य
उच्चारण: [ kaashikhend ]
उदाहरण वाक्य
- पहले खण्ड का नाम माहेश्वर खण्ड है, दूसरा वैष्णवखण्ड है, तीसरा ब्रह्मखण्ड है, चौथा काशीखण्ड एवं पांचवाँ अवन्तीखण्ड है, फिर क्रमश: नागर खण्ड एवं प्रभास खण्ड है...
- काशीखण्ड [67] में ऐसा आया है कि गंगा के तट पर सभी काल शुभ हैं, सभी देश शुभ हैं और सभी लोग दान ग्रहण करने के योग्य हैं।
- काशीखण्ड के अनुसार निधन के समय यहां सज्जन मनुष्यों के कान में भगवान शंकर तारक मन्त्र फ़ूंकते है, इसलिये यहां स्थित मन्दिर का नाम तारकेश्वर है.
- काशीखण्ड * में यह भी कहा गया है कि शुक्ल प्रतिपदा को गंगास्नान नित्यस्नान से सौ गुना, संक्रान्ति का स्नान सहस्त्र गुना, चन्द्र-सूर्यग्रहण का स्नान लाख गुना लाभदायक है।
- मित्र मिश्र द्वारा उद्धृत काशीखण्ड (पृ. २ ४ ०) में मत्स्योदरी को बहिरन्तश्चर कहा गया है और वह गंगा के प्रतिकूल धारा (संहार मार्ग) से मिलती थी।
- काशीखण्ड * में कहा गया है कि जो लोग गंगा के तट पर खड़े होकर दूसरे तीर्थों की प्रशंसा करते है और अपने मन में उच्च विचार नहीं रखते, वे नरक में जाते हैं।
- ' ' इसके अतिरिक्त काशी मोक्ष निर्णय एवं काशी लघु महात्म्य में और काश्याम् मरणान्मुक्ति काशीखण्ड के अन्य भाग, वाराणसी आदि में भी असी एवं वरुणा नदियों का वर्णन है और यही काशी की क्रमश: उत्तरी एवं दक्षिणी सीमा मानी गयी है।
- यहां पंचगंगा घाट भी है, इसे पंचगंगा घात इसलिये कहा जाता है, कि पुराणो के अनुसार यहां किरणा, धूतपापा, गंगा, यमुना, और सरस्वती का पवित्र सम्मेलन हुआ है, यद्यपि इनमे दो अब अद्र्श्य है, काशीखण्ड (५ ९.
- काशीखण्ड में विंध्यपर्वत और नारदजी का संवाद का वर्णन है, सत्यलोक का प्रभाव, अगस्त्य के आश्रम में देवताओं का आगमन, पतिव्रताचरित्र, तथा तीर्थ यात्रा की प्रसंशा है, इसके बाद सप्तपुरी का वर्णन सयंमिनी का निरूपण शिवशर्मा को सूर्य इन्द्र और अग्नि लोक की प्राप्ति का उल्लेख है।
- यह कहना कठिन है कि जब आरंभिक युग में यहां मनुष्य बसे तो बनारस की प्राकृतिक बनावट का क्या रुप था पर कृत्यकल्पतरु, काशीखण्ड और १ ९ वीं सदी के जान प्रिंसेप के नक्शे के आधार पर यह कहना सम्भव है कि गंगा-बरना संगम से लेकर गंगा अस्सी संगम के कुछ उत्तर तक एक कंकरीला करारा है, जो गोदौलिया नाले के पास कट जाती है।