कोमल कोठारी वाक्य
उच्चारण: [ komel kothaari ]
उदाहरण वाक्य
- १९२९ में जोधपुर में जन्मे श्री कोमल कोठारी ने उदयपुर में शिक्षा पाई और १९५३ में अपने पुराने दोस्त विजयदान देथा (जो अब देश के अग्रणी कहानीकारों में गिने जाते हैं) के साथ मिलकर 'प्रेरणा' नामक पत्रिका निकालना शुरू किया.
- वैसे पुस्तक की भूमिका, देथा की रचनाओं से बने उनके कद को कम ही करती है, अच्छा होता कि पूर्व की भांति वे भूमिका लिखने की जिम्मेदारी कोमल कोठारी पर डालकर स्वयं को कहानियां रचने के लिए स्वतंत्र रखते।
- पुस् तक की प्रस् तावना प्रतिष् ठित विद्वान कोमल कोठारी ने लिखी है, जबकि अपनी भूमिका में डॉ. भारती ने सृजन की संवेदना पर बात करते हुए लोक साहित् य के प्रति अपने समर्पण को ही रेखांकित किया है।
- बाद में हिन्दी त्रैमासिक रूपम, राजस्थानी शोध पत्रिका परम्परा, लोकगीत, गोरा हट जा, राजस्थान के प्रचलित प्रेमाख्यान का विवेचन, जैठवै रा सोहठा और कोमल कोठारी के साथ संयुक्त रूप से वाणी और लोक संस्कृति का सम्पादन किया।
- कोमल कोठारी, डॉ. कपिला वात्स्यायन और डा. ज्योतिन्द्र जैन का लम्बा सहयोग हमेशा से ही श्री लाल जोशी के लिए प्रेरणादायक रहा है जिसने उन्हें फाड़ चित्रकला की पुरानी कला पर प्रयोग करने और उसे नवीनता प्रदान करने के लिए प्रेरित किया है.
- रूस्तम भरुचा की लोकविद कोमल कोठारी से लम्बी बातचीत आधारित किताब राजस्थान: एन ओरल हिस्ट्री और धर्मवीर भारती के प्रयोगशील क्लैसिक सूरज का सातवां घोड़ा के लिखित और सिनेमाई पाठों पर गिरिराज किराड़ू के समीक्षात्मक निबंध भी किताबत के इस चौथे संस्करण में शामिल हैं.
- १ ९ २ ९ में जोधपुर में जन्मे श्री कोमल कोठारी ने उदयपुर में शिक्षा पाई और १ ९ ५ ३ में अपने पुराने दोस्त विजयदान देथा (जो अब देश के अग्रणी कहानीकारों में गिने जाते हैं) के साथ मिलकर ' प्रेरणा ' नामक पत्रिका निकालना शुरू किया.
- जां क्लाद कैरियर, अनिल करंजई, शुब्रतो मित्रा, लैस्टर जेम्स पीरीज़, अनिल अग्रवाल, केदारनाथ सिंह, कुंवरनारायण, मनोहर सिंह, अबू अब्राहम, बासु भट्टाचार्य, कोमल कोठारी जैसी शख्सियतों से उनका निजी संवाद, उनके कामकाज से उनका करीबी परिचय और इन सबको लेकर उनकी विश्वजनीन दृष्टि जैसे मुझे भी समृद्ध करती रही।
- महिलाओं द्वारा किए जाने वाले इस नृत्य को प्रोत्साहित करने और इसके विकास कर इसे राष्ट्रीय स्तर का मंच प्रदान करने में जयपुर के कलाविद् मणि गांगुली, लोक कला मंडल उदयपुर के संस्थापक देवीलाल सामर तथा जोधपुर स्थित राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के पूर्व सचिव पद्मश्री कोमल कोठारी (संस्थापक रूपायन संस्थान बोरून्दा, जोधपुर) का महत्वपूर्ण योगदान है जिससे यह राजस्थानी कला आमजन एवं देश विदेश में लोकप्रिय बनी।