खिड़किया वाक्य
उच्चारण: [ khidekiyaa ]
उदाहरण वाक्य
- यदि डॉ. अम्बेडकर चुनाव हार जाते तो गाँधी और कांग्रेस को ढ़िढोरा पीटने का मौका मिल जाता की डॉ. अम्बेडकर के साथ कोई है ही नही है, क्योकि गाँधी ने तो डॉ. अम्बेडकर के लिये लिखा था और सरदार पटेल ने घोषणा की थी कि “ डॉ. अम्बेडकर के लिए संविधान सभा के दरवाजे ही नही, खिड़किया भी बंद है ”.
- चंदू के चाचा ने चंदू की चाची को चांदनी चौक पर चाँदी के चम्मच से चटनी चटाई | इसी तरह एक और है खड़क सिंह के खड़कने से खड़कती है खिड़किया खिड़कियो के खड़कने से खड़कता है खड़क सिंह | टंग ट्विस्टर का यह एक रूप है एक और रूप है जिसमे एक ही शब्द को कई बार कहा जाता है पर सभी का मतलब अलग अलग होता है जैसे
- आपका ये पोस्ट एक कचहरी के कीमती दतावेज की माफिक है. या स्कूल की अलमारी में बंद पुराने कई रिकार्डो का लेखा जोखा.इसे एकत्र करने में आपने कितनी मेहनत लगायी होगी ….पूर्व के चिट्ठाकारो को पढ़ के लगता है …तब भले ही चिट्ठाकारी संख्या में सम्रद्ध न हो पर क्वालिटी लेखन में आज से बीस थी……..ऐसा लगता है गुजरे ज़माने की कई खिड़किया आप अकेले अवैतनिक रोज खोल रहे है …..
- हम कई खुली खिड़किया भी बंद कर देते है इस डर से की वे आलोचना के परे है. हाड मॉस के इंसान है.अपनी गलतियों से सीखते हुए वे आदमी से थोडा सा ऊपर उठे थे… के बस आप गुण गाईये …इससे एक पीड़ी में नकारात्मकता आती है …ये हम भारतीयों की शायद व्यक्ति पूजा की मानसिकता है ….पर गांधी को समझना वाकई जटिल है ….उनके कुछ इफ्फेक्ट्स बेमिसाल है…ओर कुछ …..
- हम कई खुली खिड़किया भी बंद कर देते है इस डर से की वे आलोचना के परे है. हाड मॉस के इंसान है.अपनी गलतियों से सीखते हुए वे आदमी से थोडा सा ऊपर उठे थे… के बस आप गुण गाईये …इससे एक पीड़ी में नकारात्मकता आती है …ये हम भारतीयों की शायद व्यक्ति पूजा की मानसिकता है ….पर गांधी को समझना वाकई जटिल है ….उनके कुछ इफ्फेक्ट्स बेमिसाल है…ओर कुछ …..
- एक दिन की बात है की, अपने घर की छत पर पतंग उड़ाते उड़ाते शाम हो गयी थी, देखा समने वाले भैया के चोथी मंजिल के कमरे की खिड़किया खुली थी और, उस कमरे की बत्ती जलती और बुझ जाती, हम समझे की लाइट खराब होगी, थोड़ी देर बाद देखा की थोड़ी दूर पर एक घर के 5 मंजिल के कमरे से भी लाइट जल्दी जल्दी बुझती और जल जाती.
- गोबर लिपे घरों के अधखुले दरवाजे है ं तुलसी का क्यारा, लकडि़यों की खिड़किया ँ धूप और धूल है उड़ती हु ई सूखता कुआँ और टूटी मुँडेर ह ै एक पगडंडी है कहीं जाती हु ई एक पेड़ है अपने पत्तों को उतारता हु आ एक चिड़िया पंख फड़फड़ाती हु ई हरे-पीले खेत हैं जिन पर तना हुआ है नीला आसमान सीधा पल्लू लिए लजाती एक स्त्री ह ै ढोल बजाता हुआ एक युवक ।
- खाने का कोई ढ़ंग से नही मिल रहा है बहुत ही प्रॉब्लम्भ हो हरी हैंऔर उपर से दिल्ली की गर्मी जहा सरकार और पायलट संगठन अपने रूख पर कायम है अगले पांच दिन के लिए सरकारी विमान टिकट खिड़किया बंद कर दी गई हैं तो अभी यह देखना बाकी है यात्रियोंकी मुश्किले कैसे कम होती है वे अपने गन्तव्य पर कैसे पहुच पाती हैं आकाशवाणी से समाचार नई दिल्ली से सुमिता यादव के साथ मै विनायक दत्त।
- लम्हा लम्हा गुजरता रहा, चाँद भी मंद मंद चलता रहा छटते रहे गमो के बादल आँखों मैं सेलाब उमड़ता रहा चाँद भी आज अपनी फलक पे था हम धरती पे थे मेरा मन आसमान पे था कुछ यादगार लम्हों के करीब पंहुचा ही था की? चिडियों की चहचहाने की आवाज़ आने लगी कुछ अधुरा २ सा लगता है, कुछ मन गमसुम सा चोराहे पे खुशिया है खिड़किया बंद पड़ी है आज चाँद नज़र आया नहीं मैं यु ही जलता रहा