गंधकुटी वाक्य
उच्चारण: [ ganedhekuti ]
उदाहरण वाक्य
- तब देवताओं ने वहां प्रकट होकर गंधकुटी की रचना की और गौतम स्वामी एवं कैवलज्ञान की पूजा करके दीपोत्सव का महत्व और भी बढ़ा दिया।
- उपर्युक्त मत पर विचार करने से गंधकुटी का स्मारकों के मध्य स्थित होना निश्चित हो जाता है जबकि यह उत्खनित स्थल मध्य में स्थित नहीं था।
- जिसके बाद श्रीजी की प्रतिमा को गंधकुटी में विराजित कर शोभायात्रा निकाली गई जो सदर बाजार होते हुए ज्ञान डूंगरी स्थित आचार्य वीरसागर महाराज के समाधि स्थल पहुंची।
- साथ की... गंधकुटी में श्रीजी की प्रतिमा विराजित कर शोभायात्रा निकाली-'सारे जग के है आधार मेरे महावीर भगवान, महावीर भजो अति वीर भजो ये नाम बड़ा सुखदायक है$.$.
- बुद्ध ने गंधकुटी के भीतर से ही मार को जानकर ऐसे शब् द कहे-मार, तेरे जैसे लाखों भी मेरे पुत्र को भय नहीं उत् पन् न कर सकते।
- गंधकुटी में भगवान श्री महावीर स्वामी की प्रतिमा को विराजमान करने के साथ भव्य शोभायात्रा के रूप में गाजे बाजे के साथ श्रीआदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से विद्यासागर प्रवचन हॉल तक शोभायात्रा जाएगी।
- उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि उन दिनों बुद्ध के जीवन से संबंधित स्थलों पर गंधकुटी का निर्माण होता था, तो क्या कारण है कि उत्खनन में किसी भी स्थल से इसके अवशेष नहीं मिलते?
- कथा दृश्यों के अतिरिक्त कई दृश्यों में भक्तगण स्तूप, धर्मचक्र, गंधकुटी या बुद्ध का निवास स्थान, बोधिवृक्ष का मन्दिर या इस प्रकार की पूजनीय वस्तुओं का पूजन करते हुए, अथवा हाथों में पूजन सामग्री लेकर चलते हुए दिखलाई पड़ते हैं।
- तभी सौधर्मइन्द्र अपने चारों निकाय के देवों के साथ मिलकर प्रभु की केवलज्ञान पूजा करने आया तथा धनकुबेर को आज्ञा दी, अद्भुत अनुपम मान स्तम्भ, रत्नमयी तीन परकोटे, सर्वांगसुन्दर प्रकृति के मेल मिलाप पूर्वक उपवन भूमि आदि सात भूमियाँ और आठवीं श्री मण्डप भूमि में गोलाकार बारह सभाएँ और उनके मध्य में गंधकुटी की रचना की जिसमें तीसरी पीठिका पर सिंहासनसहित कमलासन पर जगतपिता परमेश्वर तीर्थंकर महावीर विराजमान हुए।