गोबिन्द सिंह जी वाक्य
उच्चारण: [ gaobined sinh ji ]
उदाहरण वाक्य
- १ ६ ९९ में इसी दिन दशम गुरू, गुरू गोबिन्द सिंह जी ने पंजाब में आनंदपुर साहिब में देश के विभिन्न हिस्सों से पांच अनुयायियों को चुनकर खालसा पंथ की स्थापना की थी।
- एक तरफ तो यह त्योहार खेती और किसानों से जुड़ा हुआ है, वहीं इसे खालसा पंथ के...होला मोहल्लासिख धर्म के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी ने होली के अगले दिन 'होला' मनाने की परंपरा शुरू की थी।
- गुरू गोबिन्द सिंह जी ने भी नारी सम्मान को बचाने के लिए कहा था कि ‘ कुडी मार ते नडी मार, रिश्ता नइ करणा ' अर्थात लडकी हत्यारों और नशेडियों के घर कभी शादी नही करनी चाहिए।
- अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर, दुर्गियाना मन्दिर, जलियांवाला बाग, अकाल तख्त गुरुद्वारा, आनन्दपुर साहिब में तख्त श्रीकेशग़ढ़ साहिब (जहां गुरु गोबिन्द सिंह जी ने खालसा पंथ बनाया था) आदि प्रसिध्द दर्शनीय स्थल हैं।
- कौन भले कौन मंदे॥ गुरु गोबिन्द सिंह जी ने दमदमा साहिब (बठिंडा) में विद्वान भाई मणि सिंह से आदि ग्रंथ ‘ गुरु ग्रंथ साहिब ' का संपादन करवाया था जिसे स्वयं गुरु जी ने बोलकर लिखवाया था।
- उन्होने कहा कि गुरू गोबिन्द सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना जुर्म के खिलाफ लडने के लिए की थी और आज के परिवेश में कन्या भ्रूण हत्या, भ्रष्टाचार व दहेज प्रथा सबसे बड़े जालिमों के रूप में उभरे हैं।
- बीर देवेन्द्र सिंह ने बताया कि 24 को उन्होंने लोगों के साथ श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी के छोटे साहिबजादों के 300 साला शहादत दिवस पर वर्ष 2003 में बनाए चार यादगारी गेटों की उचित संभाल ने होने के चलते डीसी को मांगपत्र दिया था।
- अपने संदेश में बंटी ग्रोवर ने कहा कि आज के इस घोर कलियुग में हमें गुरू गोबिन्द सिंह जी द्वारा बताए गए मार्ग मानस की जात सबै एको पहचानबो पर चलते हुए हमें जात-पात व गरीब-अमीर को एक समान समझते हुए गरीबों व दीन-दुखियों की सेवा करनी चाहिए।
- सही बात तो यह है कि आदि गुरु नानक देव जी महाराज से लेकर संत सिपाही, साहित्यकार गुरु गोबिन्द सिंह जी तक लगभग दो सौ उनचालीस वर्षों तक की गुरु परंपरा का इतिहास सभी गुरुओं द्वारा देश एवं धर्म की रक्षा तथा एकता के लिए किए गए अभूतपूर्व त्याग एवं बलिदान से भरा पड़ा है।
- कमाल है एक पंथ जिसका स्थापना गुरु गोबिन्द सिंह जी ने धर्म की रक्षा के लिये की थी (उस समय हिन्दू सिक्ख कोई अलग नहीं थे, उस समय के सभी मुगल दस्तावेजों में गुरुओं को हिन्दू संत कहा गया है), आज उस पंथ के कुछ लोग हिन्दुओं का विरोध करके अपने धर्म की जड़ पर ही संहार कर रहे हैं।