जनकल्याणकारी राज्य वाक्य
उच्चारण: [ jenkelyaanekaari raajey ]
उदाहरण वाक्य
- ब्रिटेन के इतिहासकार डेविड ग्रीन और अमेरिका के डेविड बिएटो ने विस्तृत इतिहास देते हुए बताया है कि जनकल्याणकारी राज्य से पहले क्या था और किस तरह जनकल्याणकारी राज्य ने बड़ी संख्या में स्वयंसेवी संगठनों को विस्थापित कर दिया।
- ब्रिटेन के इतिहासकार डेविड ग्रीन और अमेरिका के डेविड बिएटो ने विस्तृत इतिहास देते हुए बताया है कि जनकल्याणकारी राज्य से पहले क्या था और किस तरह जनकल्याणकारी राज्य ने बड़ी संख्या में स्वयंसेवी संगठनों को विस्थापित कर दिया।
- इसमें जनकल्याणकारी राज्य के इतिहास और अर्थशास्त्र पर निबंध तो हैं ही उनके अलावा एथेंस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एरिस्टाइड हाटजिस ने अपने लेख में स्पष्ट किया है कि ग्रीक के वर्तमान संकट के बीज जन कल्याणकारी राज्य के पापुलिज्म में निहित हैं।
- राजधानी के ये हाल हैं तो सब जगह क्या होंगे? सवाल कई हैं, लेकिन खास सवाल ये है कि अब भी आवाज सहज में क्यों नहीं सुनी जाती, आखिर कहां है जनकल्याणकारी राज्य?संविधान में प्रस्तावना है कि भारत एक आदर्श जनकल्याणकारी राज्य होगा, लेकिन आज स्थिति इसके उलट है।
- अब दुविधा का सवाल यह है कि एक ओर तो यूनीसेफ जैसी प्रतिष्ठित संस्था 55 प्रतिशत बच्चों की कुपोषित होने की बात करती है और आर. एम.आर.सी.टी. 93 फीसदी सहरियाओं के कुपोषित होने का दावा करता है जबकि जनकल्याणकारी राज्य की सरकार की व्यावहारिक प्राथमिकता में कुपोषण को मिटाने के लिए जन आंदोलन का कोई स्थान नहीं है।
- एक जनकल्याणकारी राज्य के रूप में भारतीय राज्य ने बहुत सफलताएँ प्राप्त की हैं लेकिन शिक्षा के मोर्चे पे प्रगति बहुत धीमी हैं तमाम रिपोर्टें बताती हैं कि विषमता की दर भी बहुत ज्यादा हैं शहरी वर्ग और जनजातीय समुदाय, सवर्ण और दलित परिवारों के बच्चो के औसत वजन,कुपोषण,मातृत्व और शिशु म्रत्यु दर में बहुत ज्yaदा अन्तर हैं और यह भयावह विषमता का परिचय देता हैं
- हर जगह खुली प्रतियोगिता का बोलबाला हो जाता है और सबसे बडी बात यह होती है कि जनकल्याणकारी राज्य सरकारों के हाथ से शासकीय नियन्त्रण समाप्त हो जाते हैं, सरकार केवल 'फेसिलिटैटर‘ या बिचौलिए की भूमिका में आ जाती है और विश्व स्तर पर एक 'विश्व गाँव‘ की स्थापना होकर नए तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी ज्ञान की सहायता से उत्पादन तंत्र पर पूँजीवादी राष्ट्र अपना शिकंजा कसते चले जाते हैं।
- महाजनी पूंजीवाद, मुक्त अर्थव्यवस्था (लेसिस फेअर) मिश्रित अर्थव्यवस्था, जनकल्याणकारी राज्य, सामाजिक सुरक्षा, एकाधिकारवादी पूंजीवाद, बहुराष्ट्रीय निगम पूंजीवाद, कारपोरेटर राज्य (संभावित), भूमंडलीकरण, उपभोक्तावाद, दलाल पूंजीवाद, कृत्रिम आर्थिक संकट, मानवीय व संवेदनशील पूंजीवाद (?), सामाजिक जिम्मेदारोन्मुख पूंजीवाद (?) जैसे नकाब समय समय पर बदलकर पूंजीवाद राज्य सत्ता मंच पर जमा हुआ है।
- विडम्बना यह है कि सरकार (जिसे हम जनकल्याणकारी राज्य कहते हैं और संविधान के अनुसार हर व्यक्ति के जीवन के बुनियादी अधिकारों की रख्ज्ञा और संरक्षण करने का दायित्व राज्य का होता है) अब घोषित रूप से समाज को गरीबी की रेखा के माध्यम से दो भागों में बांट चुकी है और अब जनकल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन केवल उन परिवारों के लिये किया जाता है जो सरकार की परिभाषा के अनुरूप गरीबी की परिभाषा पर खरे उतरते हैं।