डी॰एन॰ए॰ वाक्य
उच्चारण: [ di॰en॰e॰ ]
उदाहरण वाक्य
- मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में पितृवंश समूह उस वंश समूह या हैपलोग्रुप को कहते हैं जिसका पुरुषों के वाए गुण सूत्र (Y-क्रोमोज़ोम) पर स्थित डी॰एन॰ए॰ की जांच से पता चलता है।
- मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में मातृवंश समूह उस वंश समूह या हैपलोग्रुप को कहते हैं जिसका किसी भी व्यक्ति (स्त्री या महिला) के माइटोकांड्रिया के गुण सूत्र पर स्थित डी॰एन॰ए॰ की जांच से पता चलता है।
- मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में मातृवंश समूह उस वंश समूह या हैपलोग्रुप को कहते हैं जिसका किसी भी व्यक्ति (स्त्री या महिला) के माइटोकांड्रिया के गुण सूत्र पर स्थित डी॰एन॰ए॰ की जांच से पता चलता है।
- ठीक इसी तरह मातृवंश समूहों का भी वृक्ष होता है और किसी भी पुरुष या महिला को उनका माइटोकांड्रिया का डी॰एन॰ए॰ जाँचकर बताया जा सकता है के उनकी पूर्वज माताएँ कौनसे युगों में कौनसे भिन्न स्थानों पर बसी हुई थीं।
- ठीक इसी तरह मातृवंश समूहों का भी वृक्ष होता है और किसी भी पुरुष या महिला को उनका माइटोकांड्रिया का डी॰एन॰ए॰ जाँचकर बताया जा सकता है के उनकी पूर्वज माताएँ कौनसे युगों में कौनसे भिन्न स्थानों पर बसी हुई थीं।
- माइटोकांड्रिया और वाए गुण सूत्र के डी॰एन॰ए॰ में दसियों हज़ारों साल तक कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होता और पूरी मनुष्य जाती का माइटोकांड्रिया और वाए गुण सूत्र के डी॰एन॰ए॰ के आधार पर पितृवंश समूहों में और मातृवंश समूहों में वर्गीकरण किया जा सकता है।
- माइटोकांड्रिया और वाए गुण सूत्र के डी॰एन॰ए॰ में दसियों हज़ारों साल तक कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होता और पूरी मनुष्य जाती का माइटोकांड्रिया और वाए गुण सूत्र के डी॰एन॰ए॰ के आधार पर पितृवंश समूहों में और मातृवंश समूहों में वर्गीकरण किया जा सकता है।
- माइटोकांड्रिया और वाए गुण सूत्र के डी॰एन॰ए॰ में दसियों हज़ारों साल तक कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होता और पूरी मनुष्य जाती का माइटोकांड्रिया और वाए गुण सूत्र के डी॰एन॰ए॰ के आधार पर पितृवंश समूहों में और मातृवंश समूहों में वर्गीकरण किया जा सकता है।
- माइटोकांड्रिया और वाए गुण सूत्र के डी॰एन॰ए॰ में दसियों हज़ारों साल तक कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होता और पूरी मनुष्य जाती का माइटोकांड्रिया और वाए गुण सूत्र के डी॰एन॰ए॰ के आधार पर पितृवंश समूहों में और मातृवंश समूहों में वर्गीकरण किया जा सकता है।
- २००८ में “जीनोम विवधताओं से विश्वव्यापी मनुष्य संबंधों का खुलासा” शीर्षक के साथ छापे गए वैज्ञानिक अध्ययन में विशेषज्ञों नें ६५०, ००० से अधिक डी॰एन॰ए॰ खण्डों की जांच से पता लगाया है के हज़ारों वर्षों के दौर में चरकस लोगों के पूर्वज यूरोप, मध्य एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों से मिलते जुलते थे।