तीक्ष्णता से वाक्य
उच्चारण: [ tikesnetaa s ]
"तीक्ष्णता से" अंग्रेज़ी में
उदाहरण वाक्य
- फिर वह अवचेतन का खंडन चाहे हीरों की खान हो अथवा उसमें कोयला भरा हो, अतः बुध का प्रभाव मानवता के लिए नितांत आवश्यक हो जाता है क्योंकि यह अपनी तार्किकता की तीक्ष्णता से अतिवाद को दोनों ओर से काटता है।
- आखिर क्यों नांदेड़, मालेगाँव और अजमेर जैसी जगहों पर होने वाली आंतकवादी घटनाओं और उनके लिए जिम्मेदार साम्प्रदायिक हिन्दू फासीवादी आतंकवादियों के खिलाफ भी उसी तीक्ष्णता से कार्यवाही नहीं की गई, जिस तरह कि कसाब के सन्दर्भ में की गई?
- अपनी कृति “ श्रमजीवी क्रांति और विश्वासघातक काउत्स्की ” में लेनिन ने पूंजीवादी लोकतंत्र के बारे में मजदूर वर्ग आंदोलन में भ्रम फैलाने की कोशिशों का पर्दाफाश किया और श्रमजीवी अधिनायकत्व के तहत श्रमजीवी लोकतंत्र के साथ पूंजीवादी लोकतंत्र की बड़ी तीक्ष्णता से तुलना की।
- हुअरोज़ जितनी तीक्ष्णता से ‘ स्व ' और ‘ अन्य ' के मध्य संबंधों (यहाँ शब्द और अर्थ को भी ले सकते हैं) को ओब्ज़र्व करते हैं इनके मध्य के अलगाव की उतनी ही सूक्ष्म परतें निकलकर सामने आ जाती है-एक विचित्र आयरनी.
- देवी प्रसाद मिश्र की यह कविता जिस ' हिन्दू ' ' परंपरा ' के बरक्स अपने को लोकेट करती है, खुद उस ' परंपरा ' के भीतर / बाहर अस्वीकार के स्वर पहले भी थे, लेकिन हिंदी कविता में उस ख़ास मरहले पर ऐसी तीक्ष्णता से नहीं.
- अनेकांत, स्याद्वाद आदि सिद्धान्तों पर जब तीक्ष्णता से बौद्ध और वैदिक विद्वानों द्वारा दोहरा प्रहार किया जा रहा था तब सूक्ष्मप्रज्ञ अकलंकदेव ने उन प्रहारों को अपने वाद-विद्याकवच से निरस्त करके अनेकांत, स्याद्वाद, सप्तभंगी आदि सिद्धान्तों को सुरक्षित किया था तथा प्रतिपक्षियों को सबल जवाब दिया था।
- बहुत सारे लोगों ने कहा क़ि ' दोनों एक-एक हो जाते तो काम ख़त्म हो जाता' और बहुत सारे लोग चुप रहे मिठाइयों और पार्टियों पे ज्यादा बात नहीं हुई मैं बैठा सोंच रहा हूँ संवेदनाओं की इस कठोर म्रत्यु के बारे में जिसका इस तीक्ष्णता से भान मुझे अभी-अभी हो रहा है _________________
- जयशंकर प्रसाद के गीत ‘तुमुल कोलाहल कलह में मैं हृदय की बात रे मन ' को आशा भोसले ने भी गाया है, संगीत और उनका गायन बेहद परिष्कृत है, पर हिरावल के इस ऑडियो सीडी में हृदय की उस बात को कहने पर ज्यादा जोर है, उसकी जो विकलता है, वह सुनने वाले के मर्मस्थल में तीक्ष्णता से उतरती है।
- जयशंकर प्रसाद के गीत ‘ तुमुल कोलाहल कलह में मैं हृदय की बात रे मन ' को आशा भोसले ने भी गाया है, संगीत और उनका गायन बेहद परिष्कृत है, पर हिरावल के इस ऑडियो सीडी में हृदय की उस बात को कहने पर ज्यादा जोर है, उसकी जो विकलता है, वह सुनने वाले के मर्मस्थल में तीक्ष्णता से उतरती है।
- जब कि गाँव शहरों में व्यापक आत्महत्याओं की खबरें बासी पड़ चुकी हैं, कविता उस विभाजन को दर्ज करती है, जिस के ओर साबुत भांड खड़े हैं, और दूसरी तरफ वे लोग हैं, जिन की आत्महत्याए जनसंहार की तरह व्यवस्था की पूर्वशर्त बन जाती हैं. ‘ तुम्हारी आत्महत्या की जायेगी ‘ जैसी पंक्ति अद्भुत तीक्ष्णता से उस झूठ को उद्घाटित कर देती है, जिस में प्रायोजित जनसंहार को ‘ आत्महत्याओं का नाम दिया जाता है.