तैत्तिरीय आरण्यक वाक्य
उच्चारण: [ taitetiriy aarenyek ]
उदाहरण वाक्य
- परवर्ती साहित्य में श्रीकृष्ण को देव या [[विष्णु]] रूप में प्रदर्शित करने का भाव मिलता है (दे 0 तैत्तिरीय आरण्यक, 10, 1, 6 ; [[पाणिनि]]-अष्टाध्यायी, 4, 3, 98 आदि) ।
- आरण्यकों में प्रमुख रूप से शांखायन आरण्यक, ऐतरेय आरण्यक, बृहदारण्यक, तैत्तिरीय आरण्यक, मैत्रायणी आरण्यक एवं तवलकार आरण्यक हैं इनमें से शांखायन का संबंध ऋग्वेद से रहा है शांखायान पंद्रह अध्यायों में है जिसका एक अंश कौषीतकि उपनिषद के नाम से प्रसिद्ध है.
- 10 / ref > [[तैत्तिरीय आरण्यक]] में भी ' स्मृति ' शब्द आया है balloon title = “ तैत्तिरीय आरण्यक, 1.2 ” style = color: blue > * / balloon > गौतम balloon title = “ गौतम, 1.2 ” style = color: blue > * / balloon > तथा वसिष्ठ balloon title = “ वसिष्ठ, 1.4 ” style = color: blue > * / balloon > ने स्मृति को धर्म का उपादान माना है।
- 10 / ref > [[तैत्तिरीय आरण्यक]] में भी ' स्मृति ' शब्द आया है balloon title = “ तैत्तिरीय आरण्यक, 1.2 ” style = color: blue > * / balloon > गौतम balloon title = “ गौतम, 1.2 ” style = color: blue > * / balloon > तथा वसिष्ठ balloon title = “ वसिष्ठ, 1.4 ” style = color: blue > * / balloon > ने स्मृति को धर्म का उपादान माना है।