धर्म के लक्षण वाक्य
उच्चारण: [ dherm k leksen ]
उदाहरण वाक्य
- (धैर्य, क्षमा, संयम, चोरी न करना, शौच (स्वच्छता), इन्द्रियों को वश मे रखना, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना ; ये दस धर्म के लक्षण हैं ।
- (धैर्य, क्षमा, संयम, चोरी न करना, शौच (स्वच्छता), इन्द्रियों को वश मे रखना, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना ; ये दस धर्म के लक्षण हैं ।)
- ियों को वश मे रखना), धी (बुद्धिमत्ता का प्रयोग), विद्या (अधिक से अधिक ज्ञान की पिपासा), सत्य (मन वचन कर्म से सत्य का पालन) और अक्रोध (क्रोध न करना) ; ये दस धर्म के लक्षण हैं ।
- परम आदरणीय श्री दयानंद जी, सादर सप्रेम नमस्ते! हमे आपके यह विचार जान कर घोर आश्चर्य हुआ? आप यह सूत्र कहाँसे तलाश करके ले आये? धर्म किसे कहते है? धर्म के लक्षण क्या है?
- (मनुस्मृति ६.९२) (धैर्य, क्षमा, संयम, चोरी न करना, शौच (स्वच्छता), इन्द्रियों को वश मे रखना, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना ; ये दस धर्म के लक्षण हैं ।
- ९ २) (धैर्य, क्षमा, संयम, चोरी न करना, शौच (स्वच्छता), इन्द्रियों को वश मे रखना, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना ; ये दस धर्म के लक्षण हैं ।
- आमतौर पर, गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण बहुत समान या भी पीएमएस या पूर्व मासिक धर्म के लक्षण के रूप में लगभग एक ही हो सकता है, एक शर्त है जो दुनिया भर में कई महिलाओं को सामना करना पड़ता है हो सकता है.
- अब वे कौन से कर्म हैं जो मनुष् यों को करने चाहियें और कौन से कर्म नहीं करने चाहियें, इस विषय पर महर्षि मनु महाराज ने उन कर्मों को ' धर्म के लक्षण ' नाम दिया है-” धृतिः क्षमा दमोऽस् तेयं शौचमिन् िद्रयनिग्रहः।
- दुसरे के साथ वही व्यवहार करो, जो अपने लिए भी पसंद आये ” जब सभी मनुष्य इस एक मात्र सूत्र को अपना लेंगे तब काफी समस्याए दूर हो जाएँगी १ मनुस्मृति का ६/९२ वाला श्लोक जिसमे धर्म के लक्षण कहे गए है, उसको भी अपनाना चाहिए धृति,
- धीर्विद्या सत्यं अक्रोधो, दसकं धर्म लक्षणम ॥-मनु (धैर्य, क्षमा, संयम, चोरी न करना, शौच (स्वच्छता), इन्द्रियों को वश मे रखना, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना ; ये दस धर्म के लक्षण हैं ।