धातुपाठ वाक्य
उच्चारण: [ dhaatupaath ]
उदाहरण वाक्य
- स्वयं “ पाणिनि ” के धातुपाठ में ' लिपि ' और ' लिबि ' धातु हैं।
- व्याकरण-प्रभावित संग्रहदृष्टि का मूल कदाचित् पाणिनि के धातुपाठ और गणपाठों में दिखाई पड़ता है ।
- अष्टाध्यायी में लगभग चार सहस्र सूत्र एवं पाणिनीय धातुपाठ में लगभग दो सहस्र धातु हैं ।
- आगे चलकर संस्कृत के जो कोश प्रस्तुत हुए, वे धातुपाठ अथवा गणपाठ शैली से सर्वथा भिन्न है।
- वल-वल्ल एवं बल दो अलग धातु हैं तथा पाणिनीय एवं कातन्त्र व्याकरण के धातुपाठ में उपलब्ध हैं।
- निघंटु ग्रंथों के अनंतर संस्कृत कोशों की परंपरा का उद्भव धातुपाठ, उणादिसूत्र, गणपाठ, लिंगनाुशासन के रूप में हुआ।
- अष्टाध्यायी के अतिरिक्त उसी से संबंधित गणपाठ और धातुपाठ नामक दो प्रकरण भी निश्चित रूप से पाणिनि निर्मित थे।
- अष्टाध्यायी के अतिरिक्त उसी से संबंधित गणपाठ और धातुपाठ नामक दो प्रकरण भी निश्चित रूप से पाणिनि निर्मित थे।
- अष्टाध्यायी के अतिरिक्त उसी से संबंधित गणपाठ और धातुपाठ नामक दो प्रकरण भी निश्चित रूप से पाणिनि निर्मित थे।
- आगे चलकर संस्कृत के अधिकांश कोशों में जिस प्रकार रचनाविधान और अर्थनिर्देश शैली का विकास हुआ है वह धातुपाठ या