फकीर मोहन सेनापति वाक्य
उच्चारण: [ fekir mohen saapeti ]
उदाहरण वाक्य
- यह उन कई कारणों में से एक है कि क्यों फकीर मोहन सेनापति का ‘ छह माड़ आठ गुंठ ‘ १ ८ ९ ० के उत्तरार्ध में औपनिवेशिक भारत में ऐसे एक दिलचस्प पाठ के रूप में लिखा गया.
- (फकीर मोहन सेनापति, पृ 69) मैनेजर पांडेय ने इस उपन्यास के साथ ' उड़िया में उपन्यास का उदय ' माना है और लिखा है '' भारतीय उपन्यास में किसान-जीवन के यथार्थवादी उपन्यास की परम्परा का सूत्रपात भी हुआ '' ।
- फकीर मोहन सेनापति (1843-1918) और रेवरेंड लाल बिहारी डे (1824-1892) का उपन्यास ' छ माण आठ गुंठ ' (1897) और ' गोविन्द सामंत ' (1874) एक प्रकार का उपन्यास नहीं हैं।
- मराठी, तमिल, कन्नड़, पंजाबी, हिन्दी सारे साहित्य का एक साथ अध्ययन करो और तब देखो कि प्रेमचंद ही एकमात्र महान थे या फकीर मोहन सेनापति भी कोई था-कि तकषी शिवशंकर पिल्लइ भी कोई है-कि मैथिलीशरण गुप्त के अलावा सुब्रहमण्यम भारती भी कोई है।
- गिरीश मिश्र ने लिखा हैं कि वे ' तथ्यों और तर्कों के साथ अपनी बात कहने में विश्वास' रखते हैं, पर उन्होंने कहीं भी यह नहीं लिखा है कि मैनेजर पांडेय ने कहाँ फकीर मोहन सेनापति को 'पहला साहित्यकार' कहा, जिसने 'स्थायी बंदोबस्ती के विभिन्न पहलुओं' के बारे में लिखा था।
- ओडिया भाषा के व्यास कवि फकीर मोहन सेनापति, मधुसूदन राव, नन्दकिशोर बल, गोदाबरीश मिश्र, गोदाबरीश महापात्र, कालन्दी चरण पट्टनायक, सच्चि राउतराय, अनन्त पट्टनायक, राधामोहन गडनायक, कुन्जबिहारी दास, रामकृष्ण नन्द, उपेन्द्र त्रिपाठी, उदय नारायण षडंगी, मनोज दास आदि प्रख्यात साहित्यकारों ने कुछ न कुछ बाल साहित्य का सृजन करके ओडिया भाषा के बाल साहित्य को पुष्ट किया है।
- गिरीश मिश्र ने लिखा हैं कि वे ' तथ्यों और तर्कों के साथ अपनी बात कहने में विश्वास ' रखते हैं, पर उन्होंने कहीं भी यह नहीं लिखा है कि मैनेजर पांडेय ने कहाँ फकीर मोहन सेनापति को ' पहला साहित्यकार ' कहा, जिसने ' स्थायी बंदोबस्ती के विभिन्न पहलुओं ' के बारे में लिखा था।
- कॉर्नेल विश्वविद्यालय में दिया गया उनका अभिभाषण वैसे तो बहुत सारे विषयों से सम्बंधित है, परन्तु उन सबका आधार फकीर मोहन सेनापति के ‘ छह माड़ आठ गुंठ ' [१ ८ ९ ७-१ ८ ९९] और रविन्द्रनाथ टैगोर के ‘ गोरा ' [१ ९ ० ७-१ ९ ० ९] का तुलनात्मक अध्ययन था, और इन दोनों ने अनंतमूर्ति को बहुत प्रभाबित किया.
- फकीर मोहन सेनापति और रेवरेंड लाल बिहारी डे में कोई अंतर था या नहीं? क्या फकीर मोहन सेनापति का उपन्यास ' छ माण आठ गुंठ ' और लाल बिहारी डे का उपन्यास-' गोविन्द सामंत ' एक समान है? क्या इन दोनों उपन्यासों में कृषक-जीवन एक समान वर्णित-चित्रित है? गिरीश मिश्र इससे अवश्य अवगत होंगे कि नामवर सिंह ने ' अंग्रेजी ढ़ंग का नावेल ' और ' भारतीय उपन्यास ' में अंतर किया है।
- फकीर मोहन सेनापति और रेवरेंड लाल बिहारी डे में कोई अंतर था या नहीं? क्या फकीर मोहन सेनापति का उपन्यास ' छ माण आठ गुंठ ' और लाल बिहारी डे का उपन्यास-' गोविन्द सामंत ' एक समान है? क्या इन दोनों उपन्यासों में कृषक-जीवन एक समान वर्णित-चित्रित है? गिरीश मिश्र इससे अवश्य अवगत होंगे कि नामवर सिंह ने ' अंग्रेजी ढ़ंग का नावेल ' और ' भारतीय उपन्यास ' में अंतर किया है।