फ़्रांसिसी क्रांति वाक्य
उच्चारण: [ faanesisi keraaneti ]
उदाहरण वाक्य
- फ़्रांसिसी क्रांति के उन जकोबियंस की तरह जो “ उदारता, समानता, और भाईचारे ” को पूरे यूरोप पर थोप देने का इरादा रखते थे, वाशिंगटन अब अमरीकी (साम्राज्यवादी) तौर-तरीके की श्रेष्ठता पर जोर देता है और सारी दुनिया पर इसे थोपना अपना अधिकार मानता है.
- कुछ विद्वान स्वछंदतावाद को वर्तमान के साथ अनिवार्य रूप से सतत मानते हैं, कुछ इसमें आधुनिकता के प्रारंभिक लक्षणों को देखते हैं, कुछ इसे ज्ञानोदय तर्कवाद-ज्ञानोदय का विपरीत, के विरोध की परंपरा के शुरुआत के रूप में देखते हैं और फिर भी कुछ अन्य इसे फ़्रांसिसी क्रांति के सीधे परिणाम के रूप में देखते हैं.
- कुछ विद्वान स्वछंदतावाद को वर्तमान के साथ अनिवार्य रूप से सतत मानते हैं, कुछ इसमें आधुनिकता के प्रारंभिक लक्षणों को देखते हैं, कुछ इसे ज्ञानोदय तर्कवाद-ज्ञानोदय का विपरीत, के विरोध की परंपरा के शुरुआत के रूप में देखते हैं और फिर भी कुछ अन्य इसे फ़्रांसिसी क्रांति के सीधे परिणाम के रूप में देखते हैं.
- चार्ल्स टिली, क्रांति के आधुनिक विद्वान ने, एक तख्तापलट, एक सर्वाधिकार जब्ती, एक गृहयुद्ध, एक विद्रोह और एक “महान क्रांति” (वह क्रांतियां जो आर्थिक और सामाजिक ढांचे के साथ-साथ राजनीतिक व्यवस्था में भी परिवर्तन लाती हैं, जैसे कि 1789 का फ़्रांसिसी क्रांति, 1917 की रूसी क्रांति या ईरान का इस्लामिक क्रांति) के मध्य विभेद[14] किया है.
- यद्यपि फ़्रांसिसी क्रांति के अधिकांश नेताओं ने स्त्रियों की समानता के विचार को ख़ारिज कर दिया और १७९३ के अंत में सभी नारी क्लबों को बंद कर दिया गया, लेकिन फिर भी इस युगांतरकारी क्रांति ने सामंती संबंधों पर निर्णायक मारक प्रहार करने के साथ ही कई कानूनों के द्वारा और नये सामाजिक मूल्यों के द्वारा औरतों की कानूनी स्थिति में भारी परिवर्तन किया ।
- क्रांतियों से सम्बंधित अनेकों प्रारंभिक अध्ययनों ने चार मौलिक मुद्दों पर केन्द्रित होने का प्रयास किया-प्रसिद्द एवम विवाद रहित उदाहरण जोकि वास्तव में क्रांतियों की सभी परिभाषाओं के लिए सटीक है, जैसे कि ग्लोरियस रिवौल्युशन (1688), फ़्रांसिसी क्रांति (1789-1799), 1917 की रूसी क्रांति और चीनी क्रांति (1927-1949).[9] हालांकि, प्रसिद्द हारवर्ड इतिहासकार, क्रेन ब्रिन्टन ने अपनी प्रसिद्द पुस्तक “द एनाटौमी ऑफ रिवौल्युशन” में अंग्रेजी गृहयुद्ध, अमेरिकी क्रांति, फ़्रांसिसी क्रांति और रूसी क्रांति पर ध्यान केन्द्रित किया.
- क्रांतियों से सम्बंधित अनेकों प्रारंभिक अध्ययनों ने चार मौलिक मुद्दों पर केन्द्रित होने का प्रयास किया-प्रसिद्द एवम विवाद रहित उदाहरण जोकि वास्तव में क्रांतियों की सभी परिभाषाओं के लिए सटीक है, जैसे कि ग्लोरियस रिवौल्युशन (1688), फ़्रांसिसी क्रांति (1789-1799), 1917 की रूसी क्रांति और चीनी क्रांति (1927-1949).[9] हालांकि, प्रसिद्द हारवर्ड इतिहासकार, क्रेन ब्रिन्टन ने अपनी प्रसिद्द पुस्तक “द एनाटौमी ऑफ रिवौल्युशन” में अंग्रेजी गृहयुद्ध, अमेरिकी क्रांति, फ़्रांसिसी क्रांति और रूसी क्रांति पर ध्यान केन्द्रित किया.
- क्रांतियों से सम्बंधित अनेकों प्रारंभिक अध्ययनों ने चार मौलिक मुद्दों पर केन्द्रित होने का प्रयास किया-प्रसिद्द एवम विवाद रहित उदाहरण जोकि वास्तव में क्रांतियों की सभी परिभाषाओं के लिए सटीक है, जैसे कि ग्लोरियस रिवौल्युशन (1688), फ़्रांसिसी क्रांति (1789-1799), 1917 की रूसी क्रांति और चीनी क्रांति (1927-1949).[9] हालांकि, प्रसिद्द हारवर्ड इतिहासकार, क्रेन ब्रिन्टन ने अपनी प्रसिद्द पुस्तक “द एनाटौमी ऑफ रिवौल्युशन” में अंग्रेजी गृहयुद्ध, अमेरिकी क्रांति, फ़्रांसिसी क्रांति और रूसी क्रांति पर ध्यान केन्द्रित किया.[11]
- क्रांतियों से सम्बंधित अनेकों प्रारंभिक अध्ययनों ने चार मौलिक मुद्दों पर केन्द्रित होने का प्रयास किया-प्रसिद्द एवम विवाद रहित उदाहरण जोकि वास्तव में क्रांतियों की सभी परिभाषाओं के लिए सटीक है, जैसे कि ग्लोरियस रिवौल्युशन (1688), फ़्रांसिसी क्रांति (1789-1799), 1917 की रूसी क्रांति और चीनी क्रांति (1927-1949).[9] हालांकि, प्रसिद्द हारवर्ड इतिहासकार, क्रेन ब्रिन्टन ने अपनी प्रसिद्द पुस्तक “द एनाटौमी ऑफ रिवौल्युशन” में अंग्रेजी गृहयुद्ध, अमेरिकी क्रांति, फ़्रांसिसी क्रांति और रूसी क्रांति पर ध्यान केन्द्रित किया.[11]
- मताधिकार, सम्पत्ति के अधिकार और यौन आधार पर बरती जाने वाली हर प्रकार की असमानता के विरुद्ध जनवादी अधिकारों के व्यापक दायरे में क्रांतिकारी संघर्ष चलाने और उसे सामाजिक-राजनीतिक संघर्ष से जोड़ने के बजाय, उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में, बुर्जुआ नारी आन्दोलन के नेतृत्व ने फ़्रांसिसी क्रांति काल की परम्परा को छोड़ते हुए अपना उद्देश्य केवल बुर्जुआ समाज के फ्रेमवर्क के भीतर, अपने ही वर्ग के पुरुषों से स्त्रियों की समानता तक सीमित कर दिया और स्त्री-प्रश्न की अवधारणा को संकीर्ण करके संघर्ष को सुधारों के दायरे में कैद कर दिया ।