बोल राधा बोल वाक्य
उच्चारण: [ bol raadhaa bol ]
उदाहरण वाक्य
- मैंने एनएसडी के बाद टीना मुनीम जैसी अभिनेत्री के साथ बतौर हीरो अपना कैरियर शुरू किया था पर बहुत कम लोग जानते हैं कि बोल राधा बोल में मैंने खलनायक तक की भूमिकाएं की और आज भी मैं फिरोज खान की सूची में दयावान के बाद सबसे बेहतर अभिनेता हूँ।
- ठिठुर-ठिठुर कर, किसी तरह से यात्रा पूरी करने वाले चांद ने जब अपनी माता से ' मोटा एक झिंगोला ' की मांग की थी तब भी यही समस्या आई थी-' घटता-बढ़ता रोज, कभी कम होगा कि नहीं, बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं ' ।
- शैलेंद्र के गीत पर शंकर जयकिशन का संगीत इस फिल्म की तरह ही इतिहास रच गया| बोल राधा बोल एवं मैं क्या करू राम जैसे नट खट गानों के साथ गम में डूबा दोस्त दोस्त न रहा जैसा गाना और ये मेरा प्रेम पत्र जैसा प्रेम बरसता गाना आज भी उतनी ही शिद्दत से सुने जाते हैं|
- इसी तरह शंकर जयकिशन नें भी ' संगम ' के गीत “ बोल राधा बोल ” में वैयजंतीमाला, ' मेरा नाम जोकर ' के गीत “ तीतर के दो आगे तीतर ” में सिमी गरेवाल और ' ऐन ईवनिंग् इन पैरिस ' के गीत “ आसमान से आया फ़रिश्ता ” में शर्मीला टैगोर की आवाज़ ली।
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- मेरे मन की गंगा और तेरे मन की जमुना काबोल राधा बोल संगम होगा की नहींअरे बोल राधा बोल संगम होगा की नहींनहीं, कभी नहीं!कितनी सदियाँ बीत गईं हैंहाय तुझे समझाने मेंमेरे जैसा धीरज वाला है कोई और ज़माने मेंमन का बढ़ता बोझ कभी कम होगा की नहींबोल राधा बोल संगम होगा की नहींजा जा!दो नदियों का मेल अगर इतना पावन कहलाता हैक्यों न जहाँ दो दिल मिलते हैं,
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- इस तरह की हास्य-व्यंग्य से लबरेज़ नक़्क़ाली के विषय अक्सर सामाजिक होते थे, कई बार फ़िल्मी, पर बाज़ मर्तबा राजनीतिक भी, जैसे कि सदाबहार मौज़ू ‘ महँगाई ' को लेकर सीधे-सीधे भारत की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री से पूछा गया सवाल, जो कि बतर्ज़ ‘ बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं ' गुनगुनाये जाने पर सामान्य से किंचित अतिरिक्त फैलती मुस्कान की वजह बनता होगा:
- फिर चाहे वह ६ ० के मध्य में बनी फिल्म असली नकली में साधना का देवआनंद का अंगरेजी पढ़ाना हो या ७ ० के दशक की राजा जानी में हेमा मालिनी बिगड़ते हुए अंदाज में नायक धर्मेंद्र को एबीसीड़ी छोड़ो नैनो से नैना जोड़ो कहने को बोलती है, अंगरेजी की यही पाठशाला ९ ० में ऋषि कपूर फिल्म बोल राधा बोल तो सलमान खान फिल्म कुर्बान में चलाते नजर आये.
- ' राजा की आएगी बारात ', ' तिरंगा ', ' नागिन ', ' नगीना ', ' करण अर्जुन ', ' शोला और शबनम ', ' बोल राधा बोल, दूल्हे राजा, बीवी नंबर वन, कुली नंबर वन, राजा, बादल, राजा हिंदुस्तानी ', ' मोहब्बतें ', ' धडक़न ', ' कुछ कुछ होता है ' जैसी कई फिल्में मैंने सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे बैठकर देखी हैं।