बौधायन धर्मसूत्र वाक्य
उच्चारण: [ baudhaayen dhermesuter ]
उदाहरण वाक्य
- बौधायन धर्मसूत्र [217] का कथन है कि सात प्रकार के व्यक्ति एक-दूसरे से अति सम्बन्धित हैं, और वे अविभक्तदाय सपिण्ड कहे जाते हैं-प्रपितामह, पिता, स्वयं व्यक्ति (जो अपने से पूर्व से तीन को पिण्ड देता है), उसके सहोदर भाई, उसका पुत्र (उसी की जाति वाली पत्नी से उत्पन्न) पौत्र एवं प्रपौत्र।
- balloon title = “ बौधायन धर्मसूत्र 2. 2.4.17 ” style = color: blue > * / balloon > किन्तु वर्तमान गौतम धर्मसूत्र में यह मत उपलब्ध नहीं होता, अपितु इसके स्थान पर यह कहा गया है कि आपत्काल में ब्राह्मण क्षत्रिय तथा वैश्य की वृत्ति को भी अपना सकता है।
- बौधायन धर्मसूत्र (२ १ ५) में जब गणपति का वर्तमान स्वरूप निश्चित हो गया और देवी भागवत पुराण (११ / १ ७) ने पंचायतन देव वर्ग में शिव-शक्ति, विष्णु और सूर्य के स्थान गणेश को सम्मिलित कर लिया तो कला और शिल्प जगत में उनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी।
- इसके अतिरिक्त जैन ग्रंथ भगवती सूत्र और सूत्र कृतांग, पाणिनी की अष्टाध्यायी, बौधायन धर्मसूत्र (ईसापूर्व सातवीं सदी में रचित) और महाभारत में उपलब्ध जनपद सूची पर दृष्टिपात करें तो पाएंगे कि उत्तर में हिमालय से कन्याकुमारी तक तथा पष्चिम में गांधार प्रदेश से लेकर पूर्व में असम तक का प्रदेश इन जनपदों से आच्छादित था ।
- इसके अतिरिक्त जैन ग्रंथ भगवती सूत्र और सूत्र कृतांग, पाणिनी की अष्टाध्यायी, बौधायन धर्मसूत्र (ईसापूर्व सातवीं सदी में रचित) और महाभारत में उपलब्ध जनपद सूची पर दृष्टिपात करें तो पाएंगे कि उत्तर में हिमालय से कन्याकुमारी तक तथा पष्चिम में गांधार प्रदेश से लेकर पूर्व में असम तक का प्रदेश इन जनपदों से आच्छादित था ।
- इसके अतिरिक्त जैन ग्रंथ भगवती सूत्र और सूत्र कृतांग, पाणिनी की अष्टाध्यायी, बौधायन धर्मसूत्र (ईसापूर्व सातवीं सदी में रचित) और महाभारत में उपलब्ध जनपद सूची पर दृष्टिपात करें तो पाएंगे कि उत्तर में हिमालय से कन्याकुमारी तक तथा पष्चिम में गांधार प्रदेश से लेकर पूर्व में असम तक का प्रदेश इन जनपदों से आच्छादित था ।
- इसके अतिरिक्त जैन ग्रंथ भगवती सूत्र और सूत्र कृतांग, पाणिनी की अष्टाध्यायी, बौधायन धर्मसूत्र (ईसापूर्व सातवीं सदी में रचित) और महाभारत में उपलब्ध जनपद सूची पर दृष्टिपात करें तो पाएंगे कि उत्तर में हिमालय से कन्याकुमारी तक तथा पष्चिम में गांधार प्रदेश से लेकर पूर्व में असम तक का प्रदेश इन जनपदों से आच्छादित था ।
- बौधायन धर्मसूत्र [268] का कथन है कि सात प्रकार के व्यक्ति एक-दूसरे से अति सम्बन्धित हैं, और वे अविभक्तदाय सपिण्ड कहे जाते हैं-प्रपितामह, पिता, स्वयं व्यक्ति (जो अपने से पूर्व से तीन को पिण्ड देता है), उसके सहोदर भाई, उसका पुत्र (उसी की जाति वाली पत्नी से उत्पन्न) पौत्र एवं प्रपौत्र।
- balloon title = “ बौधायन धर्मसूत्र 1. 1.7 तथा 2.2.17 ” style = color: blue > * / balloon > सामवेद के श्रौतसूत्र लाट्यायन balloon title = “ श्रौतसूत्र लाट्यायन, 1.3.3 तथा 1.4.17 ” style = color: blue > * / balloon > एवं द्राह्यायण balloon title = “ द्राह्यायण, 1.4.17 तथा 9.3.15 ” style = color: blue > * / balloon > भी गौतम को उद्धृत करते हैं।