भतरी वाक्य
उच्चारण: [ bhetri ]
उदाहरण वाक्य
- यह एक ऐसा मनोरम उद्यान है, जहां व्यापक रूप से प्रचलित छत्तीसगढ़ी भाषा के साथ हल्बी, भतरी, गोंडी, सादरी जैसी आंचलिक बोलियों के रंग-बिरंगे फूल अपने मधुर गीत-संगीत की मीठी महक से सहज ही सबको आकर्षित करते हैं।
- एक तरफ छत्ती्सगढी की समृद्ध वाचिक परम्परा है, वहीं दूसरी ओर हलबी, भतरी, खडिया, तूती, मुंडा, बिरहोड, पर्जी, दोर्ली, दाडामी माडिया, मुरिया, अबुझमाडिया आदि आदिवासी बोलियों की प्राणवंत धडकन है ।
- सारे सम्मोहन सही हैं पर यह मूलतः ओड़िया संस्कृतिकर्म है, भतरी बोली का जुडाव कालांतर में हुआ! मेरे विचार से इसे इसी रूप में स्वीकार किया जाना चाहिये कि यह विशुद्ध बस्तरिया संस्कृति कर्म / नाट / नाट्य नहीं है!
- बाद में अनूप रंजन साक्षरता के यज्ञ में राज्य संसाधन केन्द्र, भोपाल से जुड़े और लगभग 50 से अधिक नवपाठक साहित्य का संपादन किया जिसमें हिन्दी के अलावा गोंड़ी, भतरी, हल्बी, दोरली एवं छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रकाशित सामग्री उल्लेखनीय है।
- अनूप रंजन जी साक्षरता के यज्ञ में राज्य संसाधन केन्द्र, भोपाल से जुड़े और लगभग ५ ० से अधिक नवपाठक साहित्य का संपादन किया जिसमें हिन्दी के अलावा गोंड़ी, भतरी, हल्वी, दोरली, छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रकाशित सामग्री उल्लेखनीय है।
- साहित्य के विशेषज्ञ हिन्दी और उर्दू की गजलों के बहस में उलझे फिरते हैं और इधर खामोशी से यह बस्तरिया कवि हलबी और भतरी जैसी आदिम भाषाओं में मानक ग • ालें उनके लिये कहता रहा है जिनके कंधे पर तूम्बा टंगा है और कमर में लुंगी भर है।
- सावन-भादों के महीने में जब धान के खेतों में निंदाई (निंजानी / निराई) का काम चल रहा होता तब बस्तर अंचल के हल्बी और भतरी परिवेश में ‘ कहनी कुरिन (लोक कथा वाचिका) ' या ‘ कहनी कुरेया (लोक कथा वाचक) ' की पूछ-परख बढ़ जाया करती।
- बस् तर की लोक संस् कृति, लोक कला, लोक जीवन व लोक साहित् य तथा अंचल में बोली जाने वाली हल् बी-भतरी बोलियों एवं छत् तीसगढी पर अध् ययन व इन पर सतत लेखन करने वाले लाला जी निर्मल हृदय के बच् चों जैसी निश् छल व् यक्ति हैं ।
- ) एक ' भतरी ' बोली में कविता देखें-आमी खेतेआर, मसागत आमर, आमी भुतिआर, मसागत आमर गभार-धार, मसागत आमर, नांगर-फार, मसागत आमर धान-धन के नंगायला पुटका, हईं सौकार, मसागत आमर (अनुवाद: हम खेतीहर, मशक्कत हमारी, हम मजदूर मशक्कत हमारी।
- उनका मानना है कि ऐसा ही निर्णय छत् तीसगढी भाषा के लिये क् यों नहीं लिया गया जबकि 10 अक् टूबर 2007 को मुख् यमंत्री के नेतृत् व में हुए बैठक में यह सर्वसम् मति से निर्णय ले लिया गया कि क्षेत्रीय बोलियां जिनमें हल् बी, गोडी, गुडखू, भतरी व जसपुरिहा में पढाई प्राथमिक स् तर पर आरंभ की जायेगी ।