याज्ञवल्क्यस्मृति वाक्य
उच्चारण: [ yaajenyevlekyesmeriti ]
उदाहरण वाक्य
- राज-व्यवस्था के क्षेत्र में भारत (तत्कालीन आर्यावर्त) ही एकमात्र वह देश है, जहाँ मनुस्मृति से प्रारंभ होकर याज्ञवल्क्यस्मृति, नारदस्मृति, पाराशरस्मृति और कौटिल्यीय अर्थशास्त्र तक जो भी राजा, राजपरिषद्, राजकीय कर-विधान, दंड-व्यवस्था आदि के मानदंड दिए गए, वे आज भी लगभग संसार के सभी देशों के संविधान में किसी-न-किसी रूप में पाए जाते हैं।
- balloon title = “ (कालनिर्णय, पृ 0 354 ; स्मृतिकौस्तुभ, पृ 0 72) ” style = “ color: blue ” > * / balloon > * याज्ञवल्क्यस्मृति में है कि ' केवल विद्या या तप से ही व्यक्ति सुपात्र नहीं होता, वही व्यक्ति पात्र है जिसमें ये दोनों तथा कर्म (इन दोनों के समानुरूप) पाये जायें।
- उन्होंने नारदस्मृति, याज्ञवल्क्यस्मृति और मिताक्षरा के उद्धरण देकर दिखलाया कि प्राचीन काल में मल मूत्रा की सफाई, झाडू बुहारी आदि का काम दास करते थे जो किसी भी वर्ण के हो सकते थे परन्तु चातुर्वण्य में निहित असमानता के अनुकूल ब्राह्मण केवल ब्राह्मण का ही दास हो सकता था और अन्य वर्णों के व्यक्ति अनुलोम क्रम में ही अपने वर्ण अथवा अपने से ऊंचे वर्ण के व्यक्ति द्वारा ही दास बनाये जा सकते थे।
- == ग्रहण का विधान == ग्रहण पर कृत्यों के क्रम यों हैं-# गंगा या किसी अन्य जल में स्नान, # प्राणायाम, # तर्पण, # गायत्रीजप, # अग्नि में तिल एवं व्याहृतियों तथा ग्रहों के लिए व्यवस्थित मन्त्रों के साथ होम balloon title = “ (याज्ञवल्क्यस्मृति 1 / 30-301) ” style = “ color: blue ” > * / balloon >, इसके उपरान्त # आम-श्राद्ध, सोना, गायों एवं भूमि के दान।
- याज्ञवल्क्यस्मृति में भी लिखा हैं कि युवावस्था वाले वेदों के विलक्षण ज्ञाता, सामान्यत: वेदों और उनके अर्थों के जानने वाले, सामवेद, ऋग्वेद और यजुर्वेदों के कुछ-कुछ अंशों के पण्डित, बहन के लड़के, यज्ञ कराने वाले, दामाद, यज्ञ करने वाले ससुर, मामा, लड़की के लड़के, शिष्य, दायाद, (भाई-बिरादर), नातेदार, कर्मकाण्डी और तपस्वी, अन्य योग्य ब्राह्मण, पाँचों अग्नियों की उपासना करने वाले, ब्रह्मचारी और माता-पिता के भक्त ब्राह्मण, इतने ही लोगों को श्राद्ध में भोजन करवाना उत्तम हैं।