राजतरंगिनी वाक्य
उच्चारण: [ raajetrengaini ]
उदाहरण वाक्य
- कल्हण द्वारा बारहवीं सदी में संस्कृत मे लिखा गया कश्मीर का इतिहास राजतरंगिनी ऐतिहासिक विश्लेषण में स्पष्टता और परिपक्वता का प्रदर्शन करता है और भारत में इतिहास लेखन की लंबी परंपरा के ही विकास का संकेत देता है।
- कल्हण की राजतरंगिनी में वर्णित है कि कश्मीर के 11 वीं सदी के राजा हर्षदेव के दरबार में “ देवोत्पतननायक “ नामक एक अधिकारी होता था जिसका काम था मंदिरों से कीमती मूर्तियों को उखाड़कर राजा के खजाने में पहुंचाना।
- १२ वीं सदी कश्मीर के एक महान संस्कृत कवि एवं विद्वान् “कल्हण” की रचना राजतरंगिनी (राज वंशों का इतिहास) में उल्लेख है कि उत्पल राजवंश के राजा अवन्तिवर्मन के द्वारा विश्वैकसरा नामके स्थल पर अवन्तीपुर नामके नगर की स्थापना की गयी थी.
- गद्दी और खक् कर खत्रियों का उल् लेख राजतरंगिनी में विशेष रूप से मिलता है, जिनके इतिहास पर कुछ प्रकाश राजतरंगिनी के अनुवादक और भाष् यकार डॉ रघुनाथ सिंह ने अपनी टिप् पणियों में डाला है, पर इनपर विस् तृत आधिकारिक खोज की आवश् यकता है।
- गद्दी और खक् कर खत्रियों का उल् लेख राजतरंगिनी में विशेष रूप से मिलता है, जिनके इतिहास पर कुछ प्रकाश राजतरंगिनी के अनुवादक और भाष् यकार डॉ रघुनाथ सिंह ने अपनी टिप् पणियों में डाला है, पर इनपर विस् तृत आधिकारिक खोज की आवश् यकता है।
- यह एक अजब संयोग है कि ' ' एक ही परंपरा वाले आर्य प्रजाति के राजाओं और बादशाहों का इतिहास एक ही परिवार की अलग अलग भाषाओं में लगभग एक ही काल में लिखा गया '' अगर मान लिया जाए कि राजतरंगिनी भारत के इतिहास लेखन की लंबी परंपरा का ही दस्तावेज है तो हम इसमे से वस्तुनिष्ठ इतिहास की कसौटी पर किन किन चीजों को लेंगे और कौन कौन सी चीजें छांटेंगे।
- इसका हिसाब कौन रखेगा? भारत की संस्कृति और सभ्यता की एक अद्भुत कथा रचने वाला समाज ही जड़ों से उखाड़ दिया गया और भारत के भक्त निवासियों ने इसे कितनी गंभीरता से लिया? श्री संस्कृति की परंपरा, शारदा लिपि, शारदा मठ, ऋषि कश्यप द्वारा कश्मीर बसाए जाने का इतिहास, ललितादित्य का महान शासन, राजतरंगिनी के पृष्ठ, सब कैसे ‘ वितस्ता ' में बहा दिए जाएंगे?