राजपूतानी वाक्य
उच्चारण: [ raajeputaani ]
उदाहरण वाक्य
- राजपूतानी बोली-“ मैंने भी एक राजपूत के घर जन्म लिया है, एक राजपूतानी का दूध पिया है, मुझे भी कमर पर तलवार बंधना व चलाना और घुड़सवारी करना आता है | बचपन में पिता के घर खूब घोड़े दौड़ाये है इसलिए मायके क्यों जाऊं आपके साथ चलूंगी | दोनों कमाएंगे तो कर्ज जल्दी चुकेगा | ”
- उनका प्यार से बुलाया जानेवाला नाम था, “ कुंजमा ”! १ ९ ४ ७ भारत स्वतन्त्र हुआ और उसी अरसे में “ मीरा ” राजपूतानी भक्त संत कवियत्री की जीवन गाथा पर आधारित फ़िल्म बनी जिसमे, सुश्री सुब्बालक्ष्मी जी ने इतना सजीव पात्र निभाया था के लोग उन्हें आधुनिक युग की मीरा जी कहने लगे ।
- दिये की बाती ऊँची कर उसके टिम टिम करते प्रकाश में राजपूतानी ने वह पत्र पढना शुरू किया उसने जैसे जैसे वह पत्र पढ़ा उसके चेहरे पर तेज बढ़ता गया उसके बेसब्र मन ने राहत की साँस ली | पत्र पढने के बाद उसे अपने पति पर गर्व हुआ कि वह राजपूती धर्म निभाने वाले एक सच्चे राजपूत की पत्नी है और एक राजपूतानी के लिए इससे बड़ी गर्व की क्या बात हो सकती है |
- दिये की बाती ऊँची कर उसके टिम टिम करते प्रकाश में राजपूतानी ने वह पत्र पढना शुरू किया उसने जैसे जैसे वह पत्र पढ़ा उसके चेहरे पर तेज बढ़ता गया उसके बेसब्र मन ने राहत की साँस ली | पत्र पढने के बाद उसे अपने पति पर गर्व हुआ कि वह राजपूती धर्म निभाने वाले एक सच्चे राजपूत की पत्नी है और एक राजपूतानी के लिए इससे बड़ी गर्व की क्या बात हो सकती है |
- उसके जी में कई बार प्रबल आवेग हुआ कि छत पर से नीचे बाग में कूद पड़ूँ, उनके कमरे में जाऊँ और कहूँ-मैं तुम्हारी हूँ! आह! अगर सम्प्रदाय ने हमारे और उनके बीच में बाधा न खड़ी कर दी होती, तो वह इतने चिंतित क्यों होते, मुझको इतना संकोच क्यों होता, रानी मेरी अवहेलना क्यों करतीं? अगर मैं राजपूतानी होती तो रानी सहर्ष मुझे स्वीकार करतीं, पर मैं ईसा की अनुचरी होने के कारण त्याज्य हूँ।
- राजपूतानी आँखों पर हाथ दे रानी की गोद में चिपट गयी और सोढा बे रानी को पुरी बात बताई | राणा जी भी कक्ष के बाहर जाली के पीछे खड़े सब सुन रहे थे | पुरी बात सुनकर राणा जी बड़े खुश हुए बोले-“ मैं एक सवार को रूपये देकर तुम्हारे गांव आज ही भेज देता हूँ वह सेठ धनराज से तुम्हारे कर्ज का पूरा हिसाब कर ब्याज सहित रकम चुका आयेगा | और तुम यहीं रहो और अपनी गृहस्थी बसावो | ”
- पहली नज़र ' (1945) से शुरू हुई, फिर ‘ चेहरा ', ‘ राजपूतानी ' (1946), ‘ दो दिल ', ‘ नीलकमल ', ‘ तोहफा ' (1947), ‘ आग ', ‘ अनोखा प्यार ', ‘ अनोखी अदा ', ‘ मेला ', ‘ वीणा ', ‘ विद्या ' (1948), ‘ अंदाज़ ', ‘ बरसात ', ‘ शबनम ', ‘ सुनहरे दिन ' (1950), तक रुकी नहीं।