वाजश्रवा के बहाने वाक्य
उच्चारण: [ vaajeshervaa k bhaan ]
उदाहरण वाक्य
- ' वाजश्रवा के बहाने ' की भूमिका में कुँवर नारायण जी इस संग्रह की कविता के संगठन-संयोजन में ' जैविक संवेदना ' की बात करते हैं।
- ' ' आत्मजयी '' और '' वाजश्रवा के बहाने '' सरीखे उनकी कीर्ति का आधार माने जाने वाले प्रबंध-काव्य तक को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
- एक ओर गोविंद चन्द्र पाण्डे ‘ वाजश्रवा के बहाने ' संकेत सूत्र ढूंढते हैं वहीं दूसरी ओर कृष्णदत्त पालीवाल उनके साहित्य पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करते हैं।
- गद्य के सावन में यदि अभी हमारे सामने वरिष्ठ कवि कुँवर नारायण की रचना ‘ वाजश्रवा के बहाने ' आई है तो कहानियों के भादो में है ‘
- ' जीवन जीवन की पुकार है खेल रहा है शीतलदाह ' (कामायनी) जैसी अमर पंक्तियाँ ' वाजश्रवा के बहाने ' पढ़ते समय आपके भीतर गूँजने लगेंगी।
- ' ' आत्मजयी '' में कवि-दृष्टि के केन्द्र में मृत्यु थी, तो, '' वाजश्रवा के बहाने '' में जीवन की ओर से मृत्यु को देखने की कोशिश की गई है।
- आखिर क् या वजह है कि मिथकों पर लिखे गए काव् यों में केवल कुछ ही-और हाल में कुँवर नारायण का ' वाजश्रवा के बहाने ' ही ध् यातव् य है।
- नचिकेता की वापसी यदि वाजश्रवा को अपनी भूलचूक सुधारने का एक अमूल्य अवसर देता है तो वाजश्रवा के बहाने कुंवर नारायण अपने कृतित्व की एक विदग्ध, कालजयी और मूल्यवान रेखा खींचते हैं।
- वाजश्रवा के बहाने जैसी कालजयी कृति के रचयिता और हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि कुँवरनारायण को हिन्दी का प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष २००५ के लिए राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के हाथों प्राप्त हुआ।
- कुंवर नारायण का वाजश्रवा के बहाने अपने समकालीनों और परवर्तियों के काव्य संग्रहों के बीच एक अलग और विशिष्ट स्वाद देने वाला है जिसे प्रौढ़ विचारशील मन से ही महसूस किया जा सकता है।