विद्या और अविद्या वाक्य
उच्चारण: [ videyaa aur avideyaa ]
उदाहरण वाक्य
- प्लेटो ने विशेष पदार्थों के बोध को सम्मति का पद दिया, और सम्मति को विद्या और अविद्या के मध्य में रखा।
- (ईशावास् योपनिषद मे विद्या और अविद्या के साथ-साथ सम् भूति एवं असम् भूति पर काफी विस् तृत चर्चा की जा सकती है।
- यह भी कि उत्पत्ति, प्रलय, प्राणियों के पूर्व व उत्तर जन्म, विद्या और अविद्या को एक साथ जानने वाले को भी भगवान कहते हैं।
- वस्तुत: विद्या और अविद्या का फर्क न समझा जा सकेगा, यदि जाग्रत, स्वप्न सुषुप्ति और तुरीय की चार अवस्थाओं को न समझा जा सके।
- आत्मा और परमात्मा का संबंध, विद्या और अविद्या का भेद, कर्म और पुनर्जन्म के संबंध में बहुत ही युक्तिसंगत ढंग से उपनिषदों का मंतव्य बताया है।
- जो संतुलित जीवन जीना चाहें, लौकिक और पारलौकिक दोनों जीवन धाराओं का लाभ उठाना चाहें, वे विद्या और अविद्या दोनों को जानें और उनका संतुलित उपयोग करें ।
- विद्या और अविद्या को जो व्यक्ति ठीक से साथ साथ समझता है वो अविद्या के द्वारा मृत्यु को पार करके विद्या के द्वारा अमरता या अमृत को प्राप्त करता है।
- इस में ईश्वर का महत्व, तथा विद्या और अविद्या का विषलेशण किया गया है, जैसे कि सभी जीवों में आत्मा समान है तथा सभी प्राणियों में ईश्वर का ही आभास है।
- ' परन्तु मैं मान नही सकता! यहसावधान वाणी मुझे अश्लील कायरता लगती है और जब मेरे जीव-गृध्र को दोपखं, जिन्हें उपनिषदों ने विद्या और अविद्या कहा है, परमाप्रकृति ने दिये हैंतो वे पंख बिना उड़े मानेंगे नही.
- [तीन] विद्या और अविद्या के बीच एक गहरी खाईं है और यह खाईं देवताओं की पुरी है उन देवताओं की जो ऊँचाइयों की अन्तिम हदें छूकर भी पाताल की तहों में पड़े हैं.