वीभत्स रस वाक्य
उच्चारण: [ vibhets res ]
उदाहरण वाक्य
- जो कविता पाठक या श्रोता को आतंकित करे, उसे भयानक रस में वर्गीकृत किया जा सकता है, मगर काव्य-संसार में भयानक और वीभत्स रस की भूमिका बहुत छोटी-सी होती है।
- वीभत्स रस के लिए हिन्दी की एक सवैया उदाहरण रूप में नीचे दी जा रही है जिसमें तथाकथित रूप से अरुचिकर शब्द दिखते हैं लेकिन इनके प्रयोग के बिना इतना स्वाभाविक चित्रण
- लेकिन इस संग्रह को पढ़ते हुए जब-जब मैं रुका तो उन पलों का वर्चस्व मुझे रोक सका जहाँ वीभत्स रस को मटियानी ने ज़िन्दगी की सचाई से जोड़ दिया है।
- प्रकृत (अभीष्ट) वीभत्स रस के वर्णन में विपरीतार्थक शृंगार रस को व्यंजित करनेवाला अभिसारिकापरक दूसरा अर्थ यहाँ कविता को दूषित कर गया है, जिसे अमतपरार्थता दोष कहा जाता है।
- ऊपर वीभत्स रस, मध्य में करुण रस और भीतर अंतिम छोर पर रौद्र रस का त्रिपादी कथारस इस कौशल से प्रवाहित हुआ है कि सहृदय सामाजिक का हृदय अभीप्सित साधारणीकरण तक सहज ही पहुँच जाता है।
- जो आनेजानेवाली गाड़ियों साईलैन्सर पाइप के धुवाँ या हवा के झोंके से उड़कर राहगीर मर्दों के ऊपर गिरकर उन्हें ' वीभत्स रस ' चखा कर उनमें ' श्मशान वैराग्य ' तो पैदा कर ही देते हैं।
- (जैसे बहुत सी कहानियों या सिने कथाओं में सेक्स वर्णन, वीभत्स रस या आतंकवाद, डकैती, लूटपाट आदि के घिनोने दृश्यांकन आदि से जन मानस में उसे अपनाने की प्रवृत्ति व्याप्त हो सकती है।
- श्रंगार रस, वीर रस, वीभत्स रस हास्य रस आदि रस मनुस्यो के मुख से उत्पन्न होते है एवं मनुष्यो के कानो द्वारा पिये जाते है और इनके पभाव भी अवश्य ही होते है वैसे ही वेद मे एक रस है जो देव पीते है उसे सोम रस कहा जाता है।
- श्रंगार रस, वीर रस, वीभत्स रस हास्य रस आदि रस मनुस्यो के मुख से उत्पन्न होते है एवं मनुष्यो के कानो द्वारा पिये जाते है और इनके पभाव भी अवश्य ही होते है वैसे ही वेद मे एक रस है जो देव पीते है उसे सोम रस कहा जाता है।
- वहां तो सिर्फ तन अनावृत रहता है लेकिन राडिया के फोनरूपी हम्माम में तो सबका मन ही नंगा हो गया और फ़िर लोगों का ऐसा विकृत रूप खुलकर सामने आया जो मन में केवल दो ही रसों की उत्पत्ति कर सकता था और वे रस थे या तो वीभत्स रस या फ़िर जुगुप्सा रस.