वेरियर एल्विन वाक्य
उच्चारण: [ veriyer elevin ]
उदाहरण वाक्य
- गोंड जनजाति, विशेषत: इस जनजाति की मुरिया शाखा में प्रचलित ' घोटुल ` संस्था के विषय में मानव विज्ञानी वेरियर एल्विन से ले कर आज तक विभिन्न लोगों ने अपने अल्पज्ञान अथवा अज्ञान के चलते अनाप-शनाप कह डाला है।
- देश और आदिवासी समाज के हित में हमें यह बदलाव करने होंगे और इसमें वेरियर एल्विन और बीडी शर्मा जैसे अध्येताओं और सिद्धांतकारों के उन विचारों का भारी योगदान होगा जो उन्होंने मुख्यधारा से हटकर आदिवासियों के साथ खड़े होकर तैयार किए हैं।
- सामाजिक मानवविज्ञानी वेरियर एल्विन, जो 1940 के दशक में गोंड बस्तर मरिया और मुंडा आदिवासियों के बीच में रहे थे और उनके जीवन और संस्कृतिक मूल्यों के बारे में इतना हृदय स्पर्शी विवरण लिखा था, उनकी अंतर्दृष्टि ने भी राष्ट्रीय चेतना पर कोई प्रभाव नहीं बनाया ।
- सामाजिक मानवविज्ञानी वेरियर एल्विन, जो 1940 के दशक में गोंड बस्तर मरिया और मुंडा आदिवासियों के बीच में रहे थे और उनके जीवन और संस्कृतिक मूल्यों के बारे में इतना हृदय स्पर्शी विवरण लिखा था, उनकी अंतर्दृष्टि ने भी राष्ट्रीय चेतना पर कोई प्रभाव नहीं बनाया ।
- सामाजिक मानवविज्ञानी वेरियर एल्विन, जो 1940 के दशक में गोंड बस्तर मरिया और मुंडा आदिवासियों के बीच में रहे थे और उनके जीवन और संस्कृतिक मूल्यों के बारे में इतना हृदय स्पर्शी विवरण लिखा था, उनकी अंतर्दृष्टि ने भी राष्ट्रीय चेतना पर कोई प्रभाव नहीं बनाया ।
- इतिहास के परतों को उधेड़ते हुए बस् तर के रूपहले परदे को मेरे सामने लाला जगदलपुरी, हीरालाल शुक् ल, निरंजन महावर, वेरियर एल्विन आदि नें तथ् यात् मक रूप से तो गुलशेर अहमद ' शानी ' और मेहरून्निशा परवेज नें कथात् मक रूप में प्रस् तुत किया है।
- ब्रिटेन के प्रसिद्ध नृतत्व-वैज्ञानिक वेरियर एल्विन (जिन्होंने बाद में भारतीय नागरिकता ग्रहण कर ली थी) बताते हैं कि ‘मिशनरियों की आदिवासियों के प्रति असहिष्णुता की वजह से बहुत सारे अच्छे सामाजिक रीति-रिवाज तो खत्म हुए ही, यहाँ तक कि नृत्य, गीत तथा ताँत बुनायी जैसे उन्नत सांस्कृतिक-आर्थिक क्रिया कलाप भी ध्वस्त हो गये।'
- बलिया की एक शाम इसकी साक्षी रही और वेरियर एल्विन के शब्दों को उधार लेकर कहें तो वह शाम बलिया के लोगों के लिए किसी वैकल्पिक विलासिता की तरह नहीं थी एक जीवन चर्या की तरह थी और सर्वाधिक महत्वपूर्ण यह था कि बिदेसिया का मंचन एक सूचना की तरह रहा कि हमारा लोकबोध अभी मरा नहीं है।
- ब्रिटेन के प्रसिद्ध नृतत्व-वैज्ञानिक वेरियर एल्विन (जिन्होंने बाद में भारतीय नागरिकता ग्रहण कर ली थी) बताते हैं कि ‘ मिशनरियों की आदिवासियों के प्रति असहिष्णुता की वजह से बहुत सारे अच्छे सामाजिक रीति-रिवाज तो खत्म हुए ही, यहाँ तक कि नृत्य, गीत तथा ताँत बुनायी जैसे उन्नत सांस्कृतिक-आर्थिक क्रिया कलाप भी ध्वस्त हो गये।
- वेरियर एल्विन की दो पुस्तकें ‘ फॉकटेल्स ऑफ महाकोशल ' तथा ‘ मिथ्स ऑफ मिडिल इंडिया ', रसेल एवं हीरालाल की ‘ कास्ट्स एण्ड ट्राइब्स ऑफ साउथ इंडिया ', थर्सटन की ‘ दी ट्राईब्स एण्ड कास्ट्स ऑफ नार्थ-वेस्टर्न प्राविन्सेस एण्ड कास्ट्स ऑफ अवध, इंथोवेन की ‘ ट्राईब्स एण्ड कास्ट्स ऑफ बॉम्बे ' आदि पुस्तकों में जनजातीय लोककथाओं का उल्लेख किया गया।