शतद्रु वाक्य
उच्चारण: [ shetderu ]
उदाहरण वाक्य
- सतलुज या सतलज का संस्कृत रूप शतद्रु है, इसका एकाधिक बार उल्लेख शब्दों का सफर में हो चुका है।
- पर जिन्होंने बितस्ता और शतद्रु के तट पर, शौरसेन, ब्रह्मर्वत्त और आर्यर्वत्त में मान रखा था, वे अब लौटने के लिए नहीं हैं”।
- भूकम्प और भूगर्भीय गतिविधियों के कारण सरस्वती के सोतों की दिशा बदली और छोटी नदी यमुना विशाल हो गयी, शतद्रु भी सौ धाराओं वाली हो गयी।
- खेल-खेल में वे यूं करतब दिखाते हैं कि उनके फेंके गेंद करोडों शिखरों को स्पर्श करते हुए कुछ इस तरह भागते हैं कि धावन-कला की माहिर शतद्रु (सतलज) भी लज्जित हो जाती है।
- महर्षि विश्वामित्र की विनम्रता को लेकर भी वेदों में एक कथा प्रसंग आता है कि किस तरह उन्हें व्यास (विपाशा) और सतलुज (शतद्रु) नदियों ने रास्ता देकर पार कराया था।
- एक सुधी व जिज्ञासु पाठक के लिए सप्तसिंधु वास्तव में उत्तर भारत की सात नदियों सरस्वती, शतद्रु, परूष्णी, असिक्नी, वितस्ता, विपाशा तथा सिन्धु के विषय में जानकारी का अद्भुत खजानाहै।
- खेल-खेल में वे यूं करतब दिखाते हैं कि उनके फेंके गेंद करोडों शिखरों को स्पर्श करते हुए कुछ इस तरह भागते हैं कि धावन-कला की माहिर शतद्रु (सतलज) भी लज्जित हो जाती है।
- ऋग्वेद के तीसरे मण्डल के वर्णनानुसार विश्वामित्र के प्रार्थना करने पर इन्द्र ने विपाशा (व्यास) तथा शतद्रु नदियों के अथाह जल को सुखा दिया, जिससे भरतों की सेना आसानी से इन नदियों को पार कर गयी।
- पूर्व से सिन्धु नदी में सीधे मिलने वाली तीन नदियाँ वितस्ता (झेलम), परुष्णी (रावी) और शतद्रु (सतलुज) (उपनदियों के साथ) और पश्चिम से भी तीन सुवास्तु (स्वात), कुभा (काबुल) और गोमती (गोमल) हैं।
- ऋग्वेद के तीसरे मण्डल के वर्णनानुसार विश्वामित्र के प्रार्थना करने पर इन्द्र ने विपाशा (व्यास) तथा शतद्रु नदियों के अथाह जल को सुखा दिया, जिससे भरतों की सेना आसानी से इन नदियों को पार कर गयी।