श्रमण संस्कृति वाक्य
उच्चारण: [ shermen sensekriti ]
उदाहरण वाक्य
- इसलिए मेरा मानना है कि भ्रष्टाचार जैसे मामलों को हल करने के लिए आर्य संस्कृति की अपेक्षा श्रमण संस्कृति के दर्शन को जनमानस में प्रचारित व प्रसारित किए जाने की जरूरत है।
- श्रमण संस्कृति में पर्युषण पर्व को खास महत्व दिया गया है। जहां शेष समस्त पर्व-त्योहारों के पीछे लौकिक कारणों की प्रमुखता है, वहीं पर्युषण पर्व के मूल में आत्म-कल्याण का लक्ष्य छिपा है।
- वही विद्याध र आज संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के नाम से प्रख्यात हैं एवं धर्म और अध्यात्म के प्रभावी प्रवक्ता और श्रमण संस्कृति की उस परमोज्वल धारा के अप्रतिम प्रतीक है ं ।
- उनमें श्रमण संस्कृति के महान साधक परम पूज्य गणाचार्यश्री विरागसागरजी महाराज के परम पूज्य शिष्य युवाचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज भी एक हैं, जो आज श्रमण संस्कृति के गौरवमयी संतों की श्रृंखला में अग्रणी और विशिष्ट स्थान रखते हैं।
- उनमें श्रमण संस्कृति के महान साधक परम पूज्य गणाचार्यश्री विरागसागरजी महाराज के परम पूज्य शिष्य युवाचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज भी एक हैं, जो आज श्रमण संस्कृति के गौरवमयी संतों की श्रृंखला में अग्रणी और विशिष्ट स्थान रखते हैं।
- संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के सुयोग्य शिष्य श्रावक शिरोमणि ऐलकश्री निशंकसागरजी महाराज भी श्रमण संस्कृति के एक ऐसे ही साधक हैं, जो आज अपने जीवन के 43 वर्ष पूर्ण कर 44वें वर्ष में पदार्पण कर रहे हैं।
- उनकी निष्पक्षता, न्यायप्रियता, निर्ग्रन्थ-श्रमण संस्कृति पर दृढ आस्था, पूर्व के आचार्यों द्वारा निर्ग्रन्थ श्रमण संस्कृति की रक्षा हेतु उठाये गये चरणों के प्रति समर्पण आदि अनेक विशेषताओं को ध्यान में रखकर मैंने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है।
- सम्पर्क मान्यबर! हम श्री दिगम्बर जैन पंचबालयति मंदिर ही नहीं, अपितु सद्ज्ञान ओर श्रमण संस्कृति के उच्च आदर्शो को जन-जन में स्थापित करने का स्वप्न ले कर आपके सामने उपस्थित है जिन्हे साकार करने का विसद कार्ये आपको करना है!
- भोपाल, 30 दिसम्बर, कर्नाटक प्रदेष के धवला नगर में स्थित प्राकृत षोध संस्थान / गोमटेष्वर विद्यापीठ में, देष की लोक भाषा और श्रमण संस्कृति में महत्वपूर्ण साहित्यिक अवदान के लिये संप्रसिद्ध कवि श्री कैलाष मड़बैया भोपाल को गोम्मट सम्मान से अलंकृत किया गया।
- श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर राजस्थान एवं महाकवि आचार्य ज्ञानसागर छात्रावास की स्थापना आपकी प्रेरणा से हुई, जिसमें प्रतिवर्ष 100 श्रमण संस्कृति समर्थक विद्वान तैयार हो कर भार वर्ष में जिनवानी का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं अर्थात सांगानेर को तो विद्वान तैआर करने की खान बना दिया है।