श्रौत सूत्र वाक्य
उच्चारण: [ sheraut suter ]
उदाहरण वाक्य
- श्रौत सूत्र, धर्म सूत्र, गृहस्थसूत्र, प्रातिशाख्य सूत्र भी इसी शैली में है किंतु पाणिनि के सूत्रों में जो निखार है वह अन्यत्र नहीं है।
- श्रौत सूत्र, धर्म सूत्र, गृहस्थसूत्र, प्रातिशाख्य सूत्र भी इसी शैली में है किंतु पाणिनि के सूत्रों में जो निखार है वह अन्यत्र नहीं है।
- श्रौत सूत्र, धर्म सूत्र, गृहस्थसूत्र, प्रातिशाख्य सूत्र भी इसी शैली में है किंतु पाणिनि के सूत्रों में जो निखार है वह अन्यत्र नहीं है।
- किंतु प्रस्तुत सुत्तों में सूत्र के वे लक्षण दृष्टिगोचर नहीं होते जो संस्कृत की प्राचीन सूत्ररचनाओं, जैसे वैदिक साहित्य के श्रौत सूत्र, गृह्म एवं धर्मसूत्र आदि में पाए जाते हैं।
- आश्वलायन श्रौत सूत्र का कथन है कि जो सब पदार्थो को प्राप्त करना चाहता है, सब विजयों का इच्छुक होता है और समस्त समृद्धि पाने की कामना करता है वह इस यज्ञ का अधिकारी है।
- आश्वलायन श्रौत सूत्र (10।6।1) का कथन है कि जो सब पदार्थो को प्राप्त करना चाहता है, सब विजयों का इच्छुक होता है और समस्त समृद्धि पाने की कामना करता है वह इस यज्ञ का अधिकारी है।
- आश्लायन (१ २ / ६) और लाटयायन (१ ० / १ ५ इत्यादि) श्रौतसूत्रों में सरस्वती के किनारे यजन-याजन का महत्त्व बतलाया गया है तथा कात्यायन श्रौत सूत्र (२ ४ / १ ०) के अनुसार सत्र समाप्ति के बाद यमुना अथवा करपचा में स्नान फलदायक बतलाया गया है।
- ब्राह्मण ग्रन्थों व श्रौत ग्रन्थों में इषीका-निर्मित शूर्प / छाज का उल्लेख आता है जिसमें करम्भ पात्र रखकर यजमान और यजमान-पत्नी क्रमशः उत्तरवेदी और दक्षिण वेदी पर आहुति देते हैं (आपस्तम्ब श्रौत सूत्र ८. ६. २ ३, बौधायन श्रौत सूत्र ५. ५. ५, ५. ५. १ ६, ५. ७. ९, ५. ८. ५, शतपथ ब्राह्मण १. १. ४. १ ९ आदि) ।
- ब्राह्मण ग्रन्थों व श्रौत ग्रन्थों में इषीका-निर्मित शूर्प / छाज का उल्लेख आता है जिसमें करम्भ पात्र रखकर यजमान और यजमान-पत्नी क्रमशः उत्तरवेदी और दक्षिण वेदी पर आहुति देते हैं (आपस्तम्ब श्रौत सूत्र ८. ६. २ ३, बौधायन श्रौत सूत्र ५. ५. ५, ५. ५. १ ६, ५. ७. ९, ५. ८. ५, शतपथ ब्राह्मण १. १. ४. १ ९ आदि) ।