षडबल वाक्य
उच्चारण: [ sedbel ]
उदाहरण वाक्य
- लिखने का तात्पर्य यह है कि किसी भी कुंडली में कोई ग्रह जब जवान अवस्था में हो और अंश बल में 120 से 180 में हो, उच्च नवांश में हो, मित्र राशि में हो, षडबल में बलवान हो, भाग्येश कर्मेश अस्त न हो और शुभ ग्रह (कारक ग्रह) की दशा चलती हो तभी शुभ फल मिल सकते हैं।
- उत्तर: वैदिक ज्योतिष पद्धति के अनुसार फलित करते समय जन्म लग्न, भाव चलित, षोडश वर्ग, षडबल, विंशोत्तरी दशा, योगिनी दशा आदि का प्रयोग किया जाता है और ग्रह की शुभता अशुभता की गणना ग्रहों की राशि अनुसार की जाती है जबकि कृष्णमूर्ति पद्धति में फलित करने के लिए जन्म लग्न, निरयण भाव चलित, भावों और ग्रहों के नक्षत्र स्वामी और नक्षत्र उप स्वामी की विंशोत्तरी दशांतर्दशा का प्रयोग किया जाता है और ग्रहों की शुभता-अशुभता उनके नक्षत्र और नक्षत्र उप स्वामी से जानी जाती है।