सी वी रमन वाक्य
उच्चारण: [ si vi remn ]
उदाहरण वाक्य
- भावनगर तथा अहमदाबाद में स्कूली शुरुआती शिक्षा के बाद में बैंगलोर के भारतीय विज्ञान संस्थान में डॉ सी वी रमन के सानिध्य में फिजिक्स में एम एससी पास करने वाले नौतम भट्ट ने 1939 में अमेरिका की मेसेचुएट्स इन्स्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी में इसी विषय में डॉक्टरेट की पदवी हासिल की।
- सर सी वी रमन आई ए सी एस में 1907 से 1933 तक भौतिकी के विविध विषयों पर शोध कार्य करते रहें तथा 1928 में उन्होंने प्रकाश के बिखराव के प्रभाव पर अपना बहुचर्चित आविष्कार किया जिसने उन्हें ख्याति के साथ अनेक पुरस्कार भी दिलवाएँ जिनमें 1930 में प्राप्त नोबल पुरस्कार भी शामिल है।
- जामनगर में 1909 में जन्मे और भावनगर तथा अहमदाबाद में स्कूली शुरुआती शिक्षा के बाद में बैंगलोर की इन्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ सायन्सिस में डॉ सी वी रमन के सानिध्य में फिजिक्स में MSc पास करने वाले नौतम भट्ट ने 1939 में अमेरिका की मेसेचुएट्स इन्स्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी में इसी विषय में डॉक्टरेट की पदवी हासिल की।
- बच्चों में आधारभूत विज्ञान संकल्पनाओ को प्रायोगिक तौर पर हाथ से करके देखने के लिए प्रयोग करने वाले सी वी रमन विज्ञान क्लब के इन विजयी सदस्यों को मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य श्रीमती शशि बाठला, प्रयोग के राष्ट्रीय संयोजक श्री दीपक कुमार व प्रयोग के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक मिस्टर एरिक वायसी ने बधाई और शुभकामनाये दी हैं।
- तो बंधुओं हवन करने से तो काम चलेगा नहीं इसलिए कमर कस लो और एक एक पाई का हिसाब चुकता करो जो कि सरकार ने आप हम पर खर्च किये हैं।..... धन्यवाद आते रहना हम भी काम करते रहेंगे और लिखते रहेंगे चिट्ठीयां.... आइसोन पर नज़रें प्रस्तुति: दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक सी वी रमन विज्ञान क्लब, यमुनानगर हरियाणा
- चन्द्रशेखर शर्मा एन आई टी कुरुक्षेत्र / हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक श्री अजमेर सिंह चौहान हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक श्री राजपाल पंचाल इरादा एन जी ओ कुरुक्षेत्र श्री सुमित कुमार क्यूरेटर कल्पना चावला मेमोरियल प्लेनेटोरियम कुरुक्षेत्र श्री सोहन लाल हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति रोहतक श्री नरेश कुमार हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति रोहतक श्री दर्शन बवेजा हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक / सी वी रमन विज्ञान क्लब, यमुनानगर
- आज जिन वैज्ञानिक शोधों पर अंग्रेजों (न्यूटन, मेंडलीफ, डार्विन) का टैग लगा है, वो सबकुछ तो हमारे भारतीय वैज्ञानिक कबका ढूंढकर उस पर ग्रन्थ लिख गए! लेकिन अंग्रेजी हुकूमत ने हमारे विश्वविद्यालयों (जैसे-नालंदा आदि) को नष्ट कर दिया और पांडुलिपियों को जला दिया ताकि किसी भी भारतीय विद्वान् का नाम न हो सके! अरे ये लोग क्या समझेंगे हमारे ज्ञानी-ध्यानी और विद्वान् ऋषि मुनियों और वैज्ञानिकों को (जैसे आर्यभट्ट, पतंजलि, कणाद, सी वी रमन आदि)!