सूर्य मण्डल वाक्य
उच्चारण: [ surey mendel ]
उदाहरण वाक्य
- स्वयंभू मण्डल की वाक् को वाचस्पत्य या वैकुरा, परमेष्ठि की वाक् को ब्राह्मणस्पत्य या सुब्रह्मण्या, सूर्य मण्डल की वाक् को ऎन्द्र अथवा गौरीविता तथा चन्द्रमा युक्त पृथ्वी की वाक् को भौम या आंभृणि कहते है।
- त्रेता युग (रामायण काल) एवं द्वापर युग (महाभारत काल) में भृगु क्षेत्र का यह भू-भाग सूर्य मण्डल के उत्तर कोशल राजवंश के अवध काशी एवं मगध वैशाली राज्यों का सीमांत क्षेत्र था ।
- -इसी प्रकार वैदिक ऋषियों के अनुसार वर्तमान सृष्टि पंचमण्डल क्रम वाली हैः-1. चन्द्र मण्डल 2. पृथ्वी मण्डल 3. सूर्य मण्डल 4. परमेष्ठी मण्डल (आकाशगंगा का) 5. स्वायम्भू मण्डल (आकाशगंगाओं से परे)..
- सूर्यमण्डल समसूत्र से अपनी कक्षा के समीप में स्थित परन्तु शरबश से पृथक् स्थित चन्द्रमण्डल जब हो तो सिनीवाली होती है, सूर्य मण्डल में आधे चन्द्रमा का प्रवेश जब हो जाये तो दर्श होता है, सूर्यमण्डल तथा चन्द्रमण्डल जब समसूत्रों में हो तो कुहू होती है, अर्थात् चन्द्रमा के अदृश्यमान होने पर।
- सूर्यमण्डल समसूत्र से अपनी कक्षा के समीप में स्थित परन्तु शरबश से पृथक् स्थित चन्द्रमण्डल जब हो तो सिनीवाली होती है, सूर्य मण्डल में आधे चन्द्रमा का प्रवेश जब हो जाये तो दर्श होता है, सूर्यमण्डल तथा चन्द्रमण्डल जब समसूत्रों में हो तो कुहू होती है, अर्थात् चन्द्रमा के अदृश्यमान होने पर।